
ओयो होटल और कंपनी को 9,750 रुपए चुकाने होंगे:उपभोक्ता फोरम ने बुकिंग के बाद कमरा न देने को सेवा में कमी माना ग्वालियर
ओयो होटल और कंपनी को 9,750 रुपए चुकाने होंगे:उपभोक्ता फोरम ने बुकिंग के बाद कमरा न देने को सेवा में कमी माना ग्वालियर
ग्वालियर जिला उपभोक्ता फोरम कोर्ट
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, ग्वालियर ने ओयो होटल सिल्वर पैलेस और ओयो कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बुकिंग के बावजूद कमरा उपलब्ध न कराना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना है।
आयोग ने ओयो होटल सिल्वर पैलेस को उपभोक्ता को 750 रुपए की बुकिंग राशि, 2,000 रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और 1,000 रुपए वाद व्यय सहित कुल 3,750 रुपए का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है।
वहीं, ओयो कंपनी को 2,000 रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और 1,000 रुपए वाद व्यय, कुल 3,000 रुपए इसी अवधि में अदा करने होंगे। दोनों पक्षों को मिलाकर उपभोक्ता को कुल 9,750 रुपए की राशि प्राप्त होगी।
यह मामला अभिषेक बादिल और उनके परिवार से जुड़ा है। उन्होंने 23 से 24 फरवरी 2024 के लिए ओयो ऐप के माध्यम से ओयो होटल सिल्वर पैलेस में एक कमरा बुक किया था और 750 रुपए का ऑनलाइन भुगतान भी किया था।
शिकायतकर्ता बोला- पूरी रात ठहरने की जगह नहीं मिली
24 फरवरी की रात जब वे होटल पहुंचे, तो होटल प्रबंधन ने उनकी बुकिंग से इनकार कर दिया और अतिरिक्त राशि की मांग की। अतिरिक्त भुगतान से मना करने पर होटल प्रबंधन ने उन्हें बाहर कर दिया।
शिकायतकर्ताओं ने आयोग को बताया कि परिवार के एक सदस्य की तबीयत खराब होने के बावजूद उन्हें पूरी रात ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं मिली, जिससे उन्हें गंभीर मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह प्रमाणित होता है कि भुगतान के बावजूद उपभोक्ता को कमरा उपलब्ध नहीं कराया गया, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
होटल संचालक ने जवाब नहीं दिया
ओयो कंपनी ने अपनी दलील में कहा था कि वह केवल एक बुकिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है और चेक-इन व कमरा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होटल की होती है। हालांकि, आयोग ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ओयो का भी यह दायित्व है कि उसके प्लेटफॉर्म से जुड़े होटल उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद उचित सुविधा उपलब्ध कराएं। उल्लेखनीय है कि होटल संचालक की ओर से आयोग में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।









