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ग्रामीण उद्यमिता को नई पहचान दे रही समूह की महिलाएं

रायगढ़ : ग्रामीण उद्यमिता को नई पहचान दे रही समूह की महिलाएं

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वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के साथ महिलाओं ने शुरू किया पोल्ट्री का काम

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राज्य शासन द्वारा ग्राम के गौठानों को ग्रामीण औद्योगिक केन्द्र के रूप में विकसित करने की योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करने के लिए महती भूमिका निभा रही। इन गोठान में जहां वर्मी कंपोस्ट निर्माण, मुर्गी पालन, मछली पालन के अलावा औद्योगिक गतिविधियों को भी शामिल किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप महिला समूह को अतिरिक्त रोजगार मुहैया हो रहा है। रोजगार मिलने से महिला समूह आर्थिक रूप से सशक्त होकर आगे बढ़ रही है। आज महिलाएं इन गोठानों के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों से जुड़कर स्वावलंबी हो रही है।
ग्रामीण औद्योगिक केन्द्र हिर्री गौठान में पूर्व में केवल वर्मी कंपोस्ट का कार्य किया जाता था। धीरे-धीरे यहां सभी महिला समूह को रोजगार देने के उद्देश्य से विभिन्न रोजगार मूलक गतिविधियों को शामिल किया गया। जिसमें मुख्य रुप से मछली पालन, मुर्गी पालन जैसे विभिन्न गतिविधियां शामिल थी। पशुपालन विभाग द्वारा ग्राम्यश्री स्व-सहायता समूह की चार महिला समूह को मुर्गी पालन के लिए 1156 चूजों को गोठान में बनी मुर्गी शेड में रखा गया एवं दाना खिला कर बड़ा किया गया। महिला समूह द्वारा नियमित देखभाल एवं समय से दाना-पानी खिलाने से चूजे जल्द विकसित हुए। आज समूह द्वारा इन मुर्गियों को स्थानीय बाजार में बेचा जा रहा है। इसके अलावा महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में मुर्गियों के अंडे की बिक्री की जा रही है। विभिन्न त्योहारों एवं स्थानीय बाजार के माध्यम से समूह द्वारा अब तक 65 हजार रुपये से अधिक अंडों का विक्रय किया जा चुका है। समूह की महिलाएं बताती है कि स्थानीय बाजार में प्रतिदिन 4 दर्जन से अधिक अंडों की बिक्री हो जाती है। आज तक समूह द्वारा मुर्गी एवं अंडे की विक्रय कर 91 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त कर चुके हैं। समूह के इस कार्य को देखते हुए गौठान में अन्य आजीविका संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं। जिसमें महिलाएं इस कार्य में निरंतर जुड़ रही है एवं साथ ही अन्य महिलाओं को प्रोत्साहित करने का भी कार्य कर रही है।

Ashish Sinha

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