छोटी उम्र से ही बच्चों को संस्कृत का ज्ञान देना बहुत जरूरी- आनंदीबेन पटेल

छोटी उम्र से ही बच्चों को संस्कृत का ज्ञान देना बहुत जरूरी- आनंदीबेन पटेल

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प्रयागराज/ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को यहां विद्या भारती के एक कार्यक्रम में कहा कि छोटी उम्र से ही बच्चों को संस्कृत का ज्ञान देना आवश्यक है, जिससे उनमें भारतीय संस्कृति के प्रति झुकाव पैदा हो सके। अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान विद्या भारती द्वारा ज्वाला देवी इंटर कालेज परिसर में आयोजित संस्कृति महोत्सव को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, “छोटे बच्चों में बहुत सी प्रतिभाएं होती हैं जिन्हें हम पहचान नहीं पाते।” उन्होंने कहा, “बच्चों के भीतर जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण का ज्ञान भी देना आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियों को हम एक बेहतर कल दे सकें। घर हो या पाठशाला हो, उतना ही पानी लीजिए जितनी जरूरत है। जल को बर्बाद मत करिए।” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्या भारती के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री यतीन्द्र ने कहा, “विद्या भारती व्यक्ति निर्माण के क्षेत्र में काम करती है औऱ शिक्षा का मूल उद्देश्य भी यही है। मनुष्य जन्म से मनुष्य नहीं होता। संस्कृति उसे मनुष्य बनाती है।” उन्होंने कहा, “विद्या भारती ने प्रारंभ से कहा है कि हिंदुत्व ही शिक्षा का अधिष्ठान इस देश का हो सकता है। इसलिए भारतीय चिंतन के आधार पर धर्म, संस्कृति, सभ्यता और दर्शन इस देश के नागरिक का निर्माण कर सकते हैं।” यतीन्द्र ने कहा कि इस देश को गौरवमयी स्थान दिलाना, दुनिया के भीतर सिरमौर बनाना, इस संकल्प के साथ विद्या भारती व्यक्ति निर्माण के क्षेत्र में लगी है। .

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श्रद्धेय दीन दयाल उपाध्याय जी विद्या भारती के काम से प्रारंभ से लगे रहे और गोरखपुर में बने प्रथम विद्यालय का विधान बना तो दीन दयाल जी उसके निर्माण में शामिल रहे ।.