डॉ_दर्शन_सिंह_बल सर आज हमारे बीच नहीं रहे…

#डॉ_दर्शन_सिंह_बल सर आज हमारे बीच नहीं रहे…

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

 डॉ दर्शन सिंह बल जी  ने कोरोना से जंग लड़ते हुए  आखिर जीवन से हार गए और आज रात्रि 2 बजे उनका दुखद निधन हो गया …

 एक बेटी की अपने पिता के नाम पाती जो अपनी मार्मिक पीड़ा दर्शाती है इस बेटी की जुबानी…..

कल तक #सोशल_मीडिया में सबकी #श्रद्धांजलि से विचलित सी मैं कभी नहीं सोच पाई कि अगले कुछ घंटों बाद अपने पिता के लिए सब पढ़ रही होंगी। विगत 15 दिनों तक उनके साथ अस्पताल में बिताए हुए पलों में मुझे लगा कि मैने अपने पिता को खोया है। लेकिन उनके जाने के बाद से अब तक लगातार आते संदेशों, फोन और लोगों से समझ आया दरअसल मेरे पिता एक बड़े परिवार के पिता, मामा, चाचा, भाई, अंकल, दादा, नाना ही नही थे वरन समाज के मार्गदर्शक, अपने शिष्यों के गुरु, कई संस्थाओं के तारणहार,कई बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के मित्र, वैज्ञानिक, लेखक, कवि, मानवता को जीते एक सरल व्यक्तित्व और बेहद प्यार करने वाले सबसे स्नेह रखने वाले एक प्रेरणा से भरपूर व्यक्तित्व थे। उनका शिष्य समुदाय आज उनकी यादों में अपनी सीख ढूंढ रहा है। उनके मित्र उनमें अपनी खुशी खोज रह हैं। उनका जाना एक शून्य दे गया। आदर्शवाद और ईमानदारी को हम बच्चों ने उन्हें सम्मान से और खुशी से जीते देखा है। आज उनको चाहने वाले जिस तरह फूट फुट कर रोए वो किसी के संदेश से ऐसे ही भावुक हो जाया करते थे।
रायगढ़ में जन्मे, पले बढ़े और रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में 1967 में मैकेनिकल से स्नातक कर, खड़गपुर आईआईटी से स्नातकोत्तर करने के बाद रविशंकर विश्वविद्यालय के मैकेनिकल के पहले डॉक्टरेट हैं। उन्होंने छत्तीसगढ के सभी प्रमुख तकनीकी संस्थाओं में भूमिका निभाई। बिलासपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में 28 वर्ष रहते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से बिलासपुर के सभी महविद्यालाओं से जुड़े रहे।उन्हे साहित्य, संस्कृत से विशेष लगाव था । इसलिए बिलासपुर का हर वर्ग उन्हे जनता है। एक समय में कई पालक अपने बच्चों के करियर के लिए मार्गदर्शन लेने आते रहे।वहां से जगदलपुर, फिर रायपुर , तकनीकी शिक्षा के संचालक बनकर अंत में सेवा निर्वित होने के बाद भी रायगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज और सरगुजा इंजीनियरिंग कॉलेज को बनाने में लगे रहे । उनके जीवन का सबसे खूबसूरत क्षण था जब वो रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के गोल्डन जुबली में चेयरमैन की आसंदी से और डायरेक्टर एनआईटी की भूमिक में मंच से बोल रहे थे। जिस महाविद्यालय में पढ़े वहां के लिए कुछ कर पाने का गर्व लिए।
सेवानिर्वित्ती के बाद भी एआईसीटीई दिल्ली से लेकर कई राज्यों में सेवाएं देते रहे। सभी के लिए उनका 70 वर्ष के बाद भी ऊर्जावान काम करना आश्चर्य रहा करता था। सुबह 5 बजे उठकर घूमने जाने से लेकर बहुत सादा और सीमित भोजन करने वाले एक अनुशासित व्यक्ति के रूप में हमे नैतिक दबाव देते रहे। उनके व्यक्तित्व का आकर्षण हम बच्चों को इतना था कि रोज उनके साथ बैठने को हम अपना अवसर मानते थे ।
उन्होंने किसके लिए क्या किया यह कहने में कम पड़ेंगे। उनका होना सबके लिए गर्व, हिम्मत, मनोबल था। उनको कुछ वर्ष पहले आत्मकथा लिखने को कहा था। जिसे एक रूप देकर गए हैं। गांव की मिट्टी का आकर्षण इतना कि अंत में वहीं रहने का सपना देखते हुए एक घर बनाया। जीवन में इतनी व्यस्तता के बावजूद हम बच्चों की छोटी छोटी खुशियों को पूरा करने में कभी कमी नही किए।
जाते जाते बता गए एक भरपूर परिवार से गए। सबका साथ बना गए। सीखा गए कि युग पुरुष जीवन ऐसे जीते हैं। कइयों ने कहा कि कई वर्षों में कोई एक ऐसा जन्म लेता है। उनके जीते हुए भी प्यार से हम कहते थे पापा आप हो तो हम कुछ भी करते हैं।
उनके हॉस्टल के बच्चों के प्रति प्रेम को समझना बस उनके बस का है जो उन्हे इस रूप में देखते आए। हॉस्टल के बच्चे के नाम , उनका स्वभाव, उनकी जरूरत और उनके बनाने को करीब से सोचकर उसपर काम करने का उनका ढंग अनोखा ही रहा।
छत्तीसगढ में आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी, एनआईटी, तकनीकी विश्वविद्यालय खोलने में उन्होंने अपनी भरपूर ऊर्जा लगाई।
एस्ट्रोलॉजी में विशेष रुचि रखते हुए वो कहते रहे अगर मैने यह मई का पहला सप्ताह निकाल दिया तो 2027 में ही जाऊंगा। पिछले 15 दिन के उनके काष्टभरे समय को करीब से देखा भी और उनको सबके बारे में सोचते हुए महसूस भी किया। कोविड से वो नही हम सब हारे। क्योंकि अभी समाज को उनकी जरूरत थी। गांव में लाइब्रेरी बनाने का उनका सपना बचा है, फिजिक्स के छात्रों को आगे लाने का प्रयास बाकी है। इंजीनियरिंग के शोध पर छत्तीसगढ को आगे ले जाने का जुनून छूटा आ है। एक आदर्शवाद में जीते शिक्षक का उदाहरण लोगों को देखना बाकी आ है। उनके शिष्यों से उन्हे बहुत आशाएं हैं।
हम बच्चे उनकी बनाई हुई संवेदनशील कृति हैं। आप सभी के प्रयासों से इस दुख से निकलने का भी प्रयास रहेगा और उनके सपनों को आगे ले जाने का भी।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)

इनके निधन पर  उनके गृह ग्राम झलमला के सभी सिक्ख समुदाय गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष  सरदार गुरु वचन सिंह एवम अवतार सिंह ज्ञानी ने अपसोस व्यक्त करते हुए कहा कि इनकी कमी हमेशा खलती रहेगी इस ख़बर को सुनकर पूरा गांव स्तंभ है किसी को यकीन नही हो रहा है की ये आज हमारे बीच नहीं रहे

इनके निधन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा की आज हमने एक अच्छे व्यक्ति को खो दिया है भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान कर परिवार को सहन शक्ति एवम दुख सहने की शक्ति दे