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Chanakya Niti: सफलता में बाधा डालते हैं ये लोग, बुरे वक्त में भी इनके सामने न फलाएं हाथ0

Chanakya Niti: दूसरों की मदद करना ही मनवता कहलाती है, इंसानियत वही है जो बुरे वक्त में दुश्मन को पानी पिलाने से कभी मना न करे. चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को कोई निर्णय समय, हालात, नीति और धर्म को मद्देनर करते हुए लेना चाहिए.

आज अच्छा वक्त चल रहा है तो जीवन में कभी दुख की घड़ी का समाना भी करना पड़ेगा लेकिन चाणक्य कहते हैं कि मुसीबत में कभी उन लोगों से मदद की गुहार न लगाएं जो दुश्मन से भी ज्यादा खरतनाक माने गए हैं.

चाणक्य के अनुसार कुछ ऐसे लोगों का जिक्र किया है जो अच्छाई का मुखौट पहनकर व्यक्ति के पीठ पीछे छुरा घोंपने से गुरेज नहीं करते. ऐसे लोग ही सफलता में बाधा डालते हैं, इनसे दूरी बनाने में ही भलाई है.

मतलबी व्यक्ति

चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति सिर्फ अपने हित के बारे में सोचता हो, जो हर समय ये सोचता हो कि दूसरों से कैसे अपना फायदा कराया जाए उससे कभी मदद की मांग नहीं करनी चाहिए. ऐसे लोग मतलब के लिए आपका साथ देने की हामी भर लेकिन अपने हित को पूरा हो जाने पर नजर भी नहीं आएंगे. ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को दुःख देने से भी नहीं हिचकिचाते. इनसे दूर रहने में ही भलाई है.

ईष्या रखने वाला

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जिस मनुष्य के अंदर जलन और ईर्ष्या का भाव होता है, वो न तो खुद तरक्की करता है न ही दूसरों को आगे बढ़ने देता है. चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति आपसे जलन का भाव रखता है बुरे वक्त में भी उसके सामने कभी हाथ न फलाएं. ईर्ष्या की आग व्यक्ति की इंसानियत खत्म कर देती है. ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति अपने प्रतिद्ंदी को असफल और दुखी देखने की तलाश में ही रहता है. ऐसे लोग आपके बुरे समय का फायदा उठाकर आपको धोखा दे सकते हैं और सफल होने से रोक सकते हैं.

मूर्खाशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च

दु:खिते सम्प्रयोगेण पंडितोऽप्यवसीदति

मदद के महत्व को समझे –  चाणक्य ने इस श्लोक में बताया है कि किन लोगों की मदद करने से पहले सौ बार सोचना चाहिए क्योंकि इनकी मदद करना भी खतरे से खाली नहीं है.चाणक्य के अनुसार मदद उसी व्यक्ति की करनी चाहिए जो मदद के महत्व को समझे. चाणक्य कहते हैं कि जैसे मूर्ख व्यक्ति की भलाई करना आपको भारी पड़ सकता है, क्योंकि मूर्खों को सही-गलत की समझ नहीं होती.

अधर्मी व्यक्ति – चाणक्य के अनुसार धर्म से भटकने वाला व्यक्ति पाप कर्म करने लगता है और दूसरों को भी गलत काम करने पर मजबूर कर देता है. चाणक्य कहते हैं ऐसे लोगों के संपर्क में रहने और उनकी मदद करने से व्यक्ति को अपमानित होना पड़ता है.

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