
नई दिल्ली :- भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामीनाथ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि प्रधानमंत्री आवास परियोजना के निर्माण पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने पर सवाल उठाया और प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत निशाना साधते हुए कहा, ‘देश को पीएम आवास नहीं सांस चाहिए।’ स्वामीनाथ ने एक खबर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सकारात्मक सोच की झूठी तसल्ली देना देशवासियों के साथ धोखा है। उन्होंने सकारात्मक सोच की झूठी तसल्ली स्वास्थ्य कर्मचारियों और उन परिवारों के साथ मजाक है जिन्होंने अपनों को खोया है और ऑक्सीजन-अस्पताल-दवा की कमी झेल रहे हैं। रेत में सिर डालना सकारात्मकता नहीं, देशवासियों के साथ धोखा है।’ स्वामीनाथ जायसवाल ने कहा की अस्पतालो में ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की मौत की खबर बेहद दुखद है. मृतकों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है. मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि वे पीड़ितों की हर संभव सहायता प्रदान करें. और वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं, उसको अभी कुछ नहीं दिख रहा है केवल बंगाल में सत्ता पाने का उसका उद्देश्य है और देश में क्या अर्थ व्यवस्था बिगड़ी है इस पर उसका किसी प्रकार का ध्यान नहीं है तथा केंद्र सरकार इस कोरोनावायरस गरीब बेसहारा लोगों मदद नहीं कर रही है ऐसे में मैं केंद्र सरकार से कहना चाहता हूं कि अपनी सत्ता का लोभ लालच छोड़कर जनता की सेवा करें क्योंकि जनता ने आपको कुर्सी पर बिठाया है और आप उसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं तथा इस कोरोना का हाल में पूरे देश में त्राहि-त्राहि मच रही है ऑक्सीजन खत्म हो गई है देश में तथा इस महामारी के प्रकोप से निपटने का कोई तरीका नहीं बचा है और अब तक हमारी केंद्र सरकार ने इससे लड़ने के लिए तैयारी भी नहीं की है ठीक से तथा अब हॉस्पिटलों में मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह भी नहीं है बेड की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है ऐसे में एक संकट यह भी है कि मरीजों को भर्ती करा जाए या नहीं अगर कर लेते हैं तो स्टाफ में कमी आ जाती है उनकी देखरेख नहीं हो पा रही है तो मैं केंद्र सरकार से गुजारिश करता हूं कि हमारी सरकार कुछ ऐसा करें जिससे हम इस कोरोना महामारी से बच सके एवं हमारा देश उन्नति की ओर प्रगतिशील हो और पहले जैसा वातावरण हो ओर केंद्र सरकार वैक्सीन, ऑक्सीजन व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दें. आने वाले दिनों में ये संकट और भी गहराएगा. इससे निबटने के लिए देश को तैयार करना होगा. वर्तमान दुर्दशा असहनीय है।
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