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बरसाना में विश्व-प्रसिद्ध लट्ठमार होली 28 को

बरसाना । हर साल होली का त्योहार आता है तो बरसाने की लट्ठमार होली का जिक्र जरूर आता है। बरसाने की लट्ठमार होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है और यह लट्ठमार होली आज पूरे उत्साह के साथ खेली जाएगी। बरसाना की रंगीली गली की लट्ठमार होली राधा और कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है और इस होली को देखने के लिए यहां दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं।

होली पर्व इस साल 8 मार्च 2023 को मनाया जाएगा। वहीं बरसाना की लट्ठमार होली आज 28 फरवरी को मनाई जाएगी। कृष्ण नगरी मथुरा, वृंदावन और बरसाना में होली काफी प्रसिद्ध है। यहां लोगों में होली खेलने का अंदाज भी काफी अलग है। भारत भर में जहां लोग केमिकल युक्त रंगों से होली खेली जाती है, इधर बरसाना में फूलों की होली खेली जाती है, कहीं रंग-गुलाल लगाए जाते हैं, तो कहीं लड्डू और कहीं लट्ठमार होली मनाने की परंपरा पूरी आस्था के साथ मनाई जाती है।

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बरसाना की लट्ठमार होली विश्वभर में इसलिए भी प्रसिद्ध है, क्योंकि इसे खेले जाने का अंदाज निराला है। लट्ठमार होली में महिलाओं को हुरियारिन और पुरुषों को हुरियारे के नाम से जाना जाता है। हुरियारिन लट्ठ लेकर हुरियारों को मजाकिया अंदाज में पीटना शुरू कर देती है। इधर पुरुष हुरियारे भी सिर पर ढाल रखकर खुद को हुरियारिनों के लट्ठ से बचाने की कोशिश करते हैं। इस दौरान गीत-संगीत का भी आयोजन होता है और कई तरह की मनोरंजक प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की जाती है।

लट्ठमार होली खेलने का इतिहास भगवान श्रीकृष्ण के समय से माना जाता है। श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारावास में हुआ था, लेकिन उनका लालन-पालन नंदगांव में माता यशोदा और नन्द बाबा के घर पर हुआ। ऐसा माना जाता है कि होली से कुछ दिन पहले ही भगवान कृष्ण अपने सखाओं को लेकर बरसाना में गोपियों के संग होली खेलने जाते थे, लेकिन जब कान्हा और उनके सखा गोपियों को रंग लगाने जाते तो गोपियां उन्हें लठ मारती थी।

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