
जाते-जाते रूला गया राकेश..होली खेलकर दी गई अंतिम विदाई
रायपुर। क्या कभी किसी शव की अंतिम विदाई होली का रंग गुलाल खेलकर करते हुए देखा सुना है आपने,लेकिन होली से ठीक दो दिन पहले राजधानी रायपुर के सदरबाजार में राकेश बैद की अंतिम विदाई पर लोग गुलाल जरूर उड़ा रहे थे पर आंख से बहते आंसू रोक नहीं पा रहे थे। शव वाहन से स्टे्रचर को कुछ बाहर खींचा गया और तोप से गुलाल उड़ाकर अपने जाबांज सिपाही को जब सलामी दी गई तो पूरा सदर स्तब्ध मौन खड़ा था।
लोगों को भरोसा नहीं हो रहा था अपने इस प्यारे साथी को इस तरह विदा करते हुए जिसके साथ हर साल मस्ती भरी होली खेला करते थे,इस बार उसके बगैर कैसे खेलेंगे? रविवार की सुबह राकेश बैद का निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा थी जिसे साथियों व परिजनों ने भारी मन से पूरा किया। कल-परसों भी सदर बाजार में होली खेली जायेगी पर न वो उमंग है न उत्साह,राकेश के बगैर फीकी रहेगी सदर की होली। वही राकेश जिसने 2015 में सदर की दो दिनी होली को फिर से जीवित किया था। तब जब प्रशासन ने यहां भी एक दिन होली खेलने का आदेश जारी कर दिया था। पूरे सदर को एकजुट कर आखिरकार प्रशासन से उन्होने अपनी बात मनवा ली और फिर से दो दिन का रंग उत्सव यहां शुरू ही नहीं करवाया बल्कि वही अंदाज भी लौटाया। सदर बाजार पाटा ग्रुप के दोस्तों को भरोसा ही नहीं हो रहा है कि राकेश ऐसे कैसे चले गया। जाते -जाते भी रूला गया राकेश ,लेकिन हमेशा सदर के लोगों की दिलों में जीवित रहेगा।









