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लाल ईट व रेत के अवैध कारोबार मामले में खनिज, राजस्व विभाग की बल्ले- बल्ले : रेत की पहुँच रही माहवारी तो ईंट छापेमारी की आड़ में कर रहे रंगदारी वसूली

लाल ईट व रेत के अवैध कारोबार मामले में खनिज, राजस्व विभाग की बल्ले- बल्ले : रेत की पहुँच रही माहवारी तो ईंट छापेमारी की आड़ में कर रहे रंगदारी वसूली

कोरबा/पाली/ जिले के पाली ब्लाक अंतर्गत ग्राम पोड़ी के लब्दा, लीमघाट, मड़वामौहा, अमरैया व मुढाली सहित आसपास क्षेत्र में संचालित दो दर्जन से अधिक अवैध ईंट भट्ठों और प्रतिबंध के बावजूद भी खुलेआम रेत के उत्खनन व परिवहन मामले पर इन दिनों खनिज व राजस्व विभाग की जमकर बल्ले- बल्ले हो रही है। जहां पोड़ी के अधीन व आसपास उक्त स्थानों में सड़क के किनारे से लेकर जंगल के अंदरूनी इलाके तक इन भट्ठों की आग सुलग रही है, तो वहीं रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर प्रदेश भर में बवाल के बीच पोड़ी- लब्दा घाट, मुढाली मार्ग, सैला, ढुकुपथरा, मुनगाडीह स्थित नदियों से अवैध रेत खनन कर ऊंचे दाम पर बिक्री से शासन को लाखों का राजस्व हानि हो रहा है।

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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पाली ब्लाक मुख्यालय से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले ग्रामो से होकर गुजरी नदियों से रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन के लिए वर्तमान तकरीबन 4 दर्जन ट्रेक्टर लगे हुए है। आप सोच रहे होंगे कि प्रतिबंध के बावजूद पाली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध कारोबार आखिर कैसे हो रहा है, तो आपको बताते चलें कि रेत मामले में इतनी संख्या में ट्रैक्टर यूं ही नही लगी हुई है, बल्कि खनिज और राजस्व अमला द्वारा उक्त कार्य के लिए उन ट्रैक्टर मालिकों से अलग- अलग माहवारी बांधी गई है। जिसके तहत रेत खनन व परिवहन का कार्य खुलेआम चल रहा है। जहां मकान निर्माण के लिए प्रतिबंध अवधि में रेत की कीमत तीन से साढ़े तीन हजार चुकानी पड़ रही है। दूसरी ओर पोड़ी क्षेत्र में संचालित दो दर्जन से अधिक लाल ईंट के कारोबार पर भी छापेमार कार्रवाई कर जमकर रंगदारी वसूली संबंधित विभाग द्वारा की जा रही है। ऐसे में हर्रा लगे न फिटकरी… रंग चोखा की तर्ज पर राजस्व व खनिज विभाग की खूब बल्ले- बल्ले हो रही है। अवैध लाल ईंट के कारोबार से जहां लीज की जटिल प्रक्रिया पूरी कर व रायल्टी जमाकर, संचालन की वैध अनुमति लेकर फ्लाई एश ईंट का व्यवसाय कर रहे लोगों को तगड़ा नुकसान हो रहा है। वहीं शासन को भी राजस्व की भारी क्षति हो रही है। लेकिन लाल ईंट व रेत के इस काले कारोबार पर नकेल कसने के बजाय संबंधित जिम्मेदार अधिकारी नोटों के चमक के आगे कुछ भी देखने को तैयार नहीं हैं। बात करें खनिज विभाग की तो इनके पास अवैध लाल ईंट भट्ठों का कोई रिकार्ड नहीं है। आश्चर्य की बात है कि शासन से मिले दायित्व का निर्वहन करने वाले खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारियों को अवैध ईंट भट्ठे और रेत उत्खनन, परिवहन नजर नहीं आ रहें हैं। अगर यही हाल रहा तो गौण खनिज के अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों के पर फैलते जाएंगे और एक दिन स्थिति तनावपूर्ण नजर आएगी। तब के हालात को लेकर संबंधित नौकरशाह ही जिम्मेदार होंगे।

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