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कोविड 19 संक्रमण काल में शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखने वाले अशासकीय विद्यालय अनुदान से वंचित

गोपाल सिंह विद्रोही प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़ शासन , स्कूल शिक्षा विभाग का संचालक , लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा राज्य में संचालित अशासकीय विद्यालयों को अनुदान के रूप में संक्रमण काल में सहायता के रूप में 357.5 लाख रुपए स्वीकृत किया गया है परंतु इस अनुदान के दायरे में ऐसे विद्यालय शामिल हो गए हैं जिन्होंने कोविड-19 संक्रमण काल में शैक्षणिक गतिविधियों से दूर थे और जो विद्यालय नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखें उन्हें दूर रखा गया है जिससे बहुत सारे विद्यालय अशासकीय विद्यालय के संचालक मायूस है और इस पूरे मामले की जांच कर न्यायोचित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं

इस संबंध में जानकारी के अनुसार अशासकीय विद्यालयों के एक दर्जन संचालकों ने बताया कि इस विषय में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से कोई अधिकृत जानकारी किसी भी तरह से सार्वजनिक सूचना जारी नही किया गया है कि यह अनुदान राशि किस पोर्टल से किन किन विद्यालयों को कब तक आवेदन करना है तथा यह राशि शिक्षण संस्थानों में किस मद में व्यय किया जाना है ? जब शैक्षणिक सूत्रों से अनुदान की सूची प्राप्त हुई है तो सूची में 302 विद्यालयों के नाम 357.5 लाख रुपए आवंटित हुए हैं , जिसमे बहुत अधिक संख्या में ऐसे विद्यालय के नाम राहत राशि आवंटित किया गया है जिनकी धरातल पर सैक्षणिक गतिविधि पूरे कोविड 19 संक्रमण काल में सुन्य रहा अथवा उक्त विद्यालय में कोई भी सैक्षणीक गतिविधि हुआ ही नहीं। यहां तक कि समस्त शिक्षको को बिना कोई सूचना पूरे वर्ष अवकाश घोषित कर दिया गया अथवा लॉक डाउन के बहाने उन शिक्षको को घर भेज दिया गया।जो सघन जांच का विषय है। जिसमे संबंधित विद्यालय के छात्र छात्राओं,अभिभावकों ,शिक्षक शिक्षिका को जांच का अभिन्न हिस्सा बना कर जांच किए जाने पर स्थिति स्पष्ट रूप से सामने होगा। विद्यालय संचालकों ने कहा कि प्रश्न यह उठता है कि इस मामले का जांच कौन और किनके निर्देशन में हो की , सब कुछ पारदर्शी रूप से सामने आ सके ।

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*जो विद्यालय वर्ष भर शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखी उन्हें नहीं मिला अनुदान*
कोयलांचल में बहुत सारे ऐसे विद्यालय है जो 16 मई 2020 से नियमित रूप से 1 वर्ष तक समस्त सैक्षणिक गतिविधि संपन्न करवाया है जिसमे ऑनलाइन क्लास, ऑनलाइन टेस्ट , ऑनलाइन मूल्यांकन , ऑनलाइन तिमाही परीक्षा , छः माही तथा वार्षिक परीक्षा लेना , मूल्यांकन करके परीक्षा परिणाम तैयार करना , जिसमे संस्था के समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं तथा कर्मचारियों का अथक परिश्रम निरंतर जारी रहा , तथा उनके परिश्रम का ही परिणाम है कि संस्था इन सभी शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सफल रही है। ऐसे विद्यालयों के संचालक इस पूरे मामले जांच कर सकारात्मक एवं न्यायोचित अनुदान प्राप्त हो , वास्तविक रूप से कोविड़ – 19 संक्रमण काल में जिन जिन विद्यालय ने अपने शिक्षक शिक्षिका तथा कर्मचारियों के साथ अपने विद्यालय के छात्र छात्राओं को नए नए अन्वेषणो के द्वारा सैक्षणिक गतिविधि संपन्न कराया हो उनके साथ न्यायपूर्ण कार्य हो सके। जिला शिक्षा पदाधिकारी से उचित कारवाही तथा पारदर्शी जांच के बाद ही राशि आवंटन की अंतिम अनुमोदन करना चाहिए , जिससे की वास्तविक रूप से शिक्षा के क्षेत्र में दिन रात अथक परिश्रम करने वाले विद्यालयों को अपने शासन तंत्र पर भरोसा बना रहे तथा उन्हें आगे भी अथक परिश्रम से राज्य के शिक्षार्थियों के साथ कार्य करने हेतु सम्बल प्रदान होता रहे।

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