मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं एवं पात्र आज भी प्रासंगिक- सुदामा राम गुप्ता”

मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं एवं पात्र आज भी प्रासंगिक- सुदामा राम गुप्ता”

“व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने किया मुंशी प्रेमचंद जी के कहानियों का पाठ”

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बतौली :उपरोक्त कथन शासकीय महाविद्यालय बतौली (सरगुजा) में आयोजित मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह में सरगुजिहा साहित्य के वरिष्ठ कहानीकार सुदामा राम गुप्ता ने कही। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद युगीन साहित्य में वर्णित घटनाएं एवं पात्र आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। “बूढ़ी काकी” कहानी में बुजुर्गों के प्रति भावों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि सही जीवन के लिए दो रोटी और अच्छी नींद की आवश्यकता है जिसमें बुजुर्गों का आशीर्वाद भी शामिल हो। वर्तमान समय में बुजुर्गों की और अधिक देखभाल करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में शरदचंद्र मेषपाल, उमेश गुप्ता, श्रीमती इंदु तिर्की, राजेश गुप्ता, विजय बहादुर यादव, विष्णु गुप्ता, परमानंद गुप्ता, लव गुप्ता एवं दिनेश सिंह विशिष्ट अतिथि के तौर पर मंचासीन थे।
व्याख्यानमाला में अपने विचार रखते हुए विकास खंड शिक्षा अधिकारी शरद चंद्र मेषपाल ने कहा कि प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानियों में तत्कालीन जीवन का सूक्ष्म वर्णन मिलता है‌। “कफन” कहानी का पाठ करते हुए उन्होंने कहा कि प्रसव पीड़ा से कराहती बुधिया के पास माधव और घीसू इसलिए नहीं जाते कि उन्हें आशंका था कि कहीं वे ज्यादा आलू न खा ले। इसमें भूख की पीड़ा के साथ मानवीय स्वभाव का वर्णन है। आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बतौली के प्राचार्य राजेश गुप्ता ने “ईदगाह” कहानी का पाठ करते हुए हामिद के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख किया। सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती इंदु तिर्की ने “सेवासदन” उपन्यास के माध्यम से नारी समस्या एवं वर्तमान समय में समाज के नारी की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अभी स्त्रियों को और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। साक्षर भारत बतौली के परियोजना अधिकारी उमेश गुप्ता ने मुंशी प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास “गोदान” के पात्रों की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे और बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने गोदान को “कृषक जीवन का महाकाव्य” कहते हुए मुंशी प्रेमचंद को “उपन्यास सम्राट” की उपाधि से विभूषित किया।

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व्याख्यानमाला में व्याख्याता दिनेश सिंह ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन चरित्र व राष्ट्रीय आंदोलन में किए गए कार्यों पर विचार व्यक्त किया, लव कुमार गुप्ता ने “कफन” कहानी के माध्यम से मनुष्य की संवेदनशीलता और संवेदनहीनता का वर्णन किया‌। व्याख्यानमाला में विजय बहादुर यादव, विष्णु गुप्ता एवं परमानंद गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने किया। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानियों एवं उपन्यासों के महत्वपूर्ण संवाद एवं घटनाओं का पाठ किया जिसमें “गबन, गोदान, पूस की रात, कफन, ईदगाह, नमक का दरोगा, पंच परमेश्वर, बूढ़ी काकी, ठाकुर का कुँआ” जैसे कृतियां सम्मिलित है।

उक्ताशय की जानकारी देते हुए महाविद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी प्रो. गोवर्धन सूर्यवंशी ने बताया कि प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन हिंदी विभाग एवं हिंदी साहित्य विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था‌। व्याख्यानमाला में महाविद्यालय के प्राचार्य बी. आर. भगत, प्रो. बलराम चंद्राकर, प्रो. तारा सिंह मरावी, श्रीमती सुभागी भगत, सुश्री मधुलिका तिग्गा, सुजीत जायसवाल, मोहसिन खान, राजेन्द्र पटेल, जितेंद्र कुमार दास एवं राम प्रसाद राम सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक तारा सिंह मरावी ने व्याख्यानमाला के अंत में आभार व्यक्त किया।