अमलीपदर क्षेत्र ग्राम खरी पथरा कोतरा डोंगरी, टेकेनपारा, कमारपारा के सैकड़ो ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें बरसात में, बिना किसी संज्ञान के प्रशासन सोया घोर निद्रा में!

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गरियाबंद / मैनपुर :- डेवलोपमेन्ट,आधुनिकरण, इंफोटेक्चर, डिजिटल इंडिया की बातें अक्सर सुनने देखने को मिलता है बड़े बड़े हेडलाइन में अखबारों के फ्रंट लाइन में छापा जाता है लेकिन उनका किया होगा जो पिछले कई सालों से या यूं कहें जन्मों से मुख्यधाराओं से अलग है, आज भी मुलभुत सुविधाओं के मोहताज़ बने हुए हैं, रोड़, गाड़ी, सड़क, पुलिया, बिजली से अनजान हैं, खासकर बरसात के दिनों में यहाँ के सैकड़ो ग्रामीण घरों में कैद हो जाते है मानो अपनो ने ही अपना साथ छोड़ दिया हो

जी हां हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ गरियबन्द जिले के ग्राम पंचायत खरिपथरा के आश्रित कोतरा डोंगरी , टेकेनपारा एवं कमारपारा का एक बड़ा सा नाला जो सालों से रोड़ा बन कर ग्रामीणों का सबसे बड़ा परेशानी का कारण बना हुआ है बरसात के दिनों में इस बड़ा सा नाला में भयंकर रूप से पानी गुजरता है दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाले होते है किसी की हिम्मत नहीं होता है कि इस पार से उस पार जा सके जिसके कारण यहाँ के सैकड़ो ग्रामीणों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे एक गाँव से दूसरे गांव का संपर्क टूट जाता है, लोग अपने राशन लेने में असमर्थ हो जाते है, बच्चे स्कूलें नहीं जा पाते, आपातकाल स्थिति में अस्पताल जाना बड़ी चुनौती बन जाता है, इस तरह विभिन्न प्रकार परेशानी से लोग जुझ रहे होते है बरसात के महीनों में

पिछले कई सालों से पुलिया या ब्रिज़ की मांग जारी

ग्रामीणों व भूतपूर्व उपसरपंच  ने  बताया कि पिछले कई वर्षों से पुलिया के अभाव से लोग परेशान हैं आने जाने में भारी दिक्कतें आ रहा है ग्राम पंचायत खरिपथरा के आश्रित कोतरा डोंगरी , टेकेनपारा एवं कमारपारा के ग्रामीणों लोग जान जोखिम में डालकर तेज धार वाली इस नदी को पार करने में मज़बूर है अब कई कई ग्रामीण दुर्घटनाओं का शिकार भी हो चुके है

अब तक कई जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को भी इसकी जानकारी बकायदा लिखकर दी गयी है जिसका अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है कई जन समस्या निराकरण शिविरों में जाकर अपना आपबीती सुनाई जा चुकी है पर संज्ञान लेने कोई दोबारा पलट कर नहीं आया इलाके के नेताओं ने भी झूठा दिलासा देने में कोई कसर नहीं छोड़ा अब तो यहाँ के ग्रामीण नेताओं का बहिष्कार करने की बातें तक कह रहे हैं!

ग्रामीणों ने प्रशासन से की विनती पुलिया हो जल्दी

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ग्राम पंचायत खरीपथरा बस्ती से 3 कि. लो. की दूर पर जंगलों के बीच तीन बस्तियां स्थित है , और वंहा लगभग 317 लोग निवास करते है , जब बर्षात का मौसम शुरू हो जाती है तब इन लोगों की समस्या बढ़ जाती है , इन्हें अपने ग्राम पंचायत तक बर्षात के दिनों आवाजाही करना नशीब नही होता , बर्षात का मौसम शुरू होते ही नदी में बाढ़ आना शुरू हो जाती है । लिहाज़ा ग्रामीणों ने सरकार व जिला प्रशासन से यह गुहार लगाई है कि उनके परेशानियों को सरकार समझे सालों से झेल रहे समस्या का निराकरण हो और जल्द से जल्द इस नाला में पुलिया के निर्माण हो जिससे कि आमजनों की दिक्कतें हमेशा हमेशा के लिए हो, लोगों को बरसात के दिनों में राहत मिल सके

दुसरीं ओर बरसात के दिनों स्कूली बच्चे सहित आम लोगों को नदी पार करने में काफी परेशानी होती है , पुल बनवाने को लेकर कई बार सरकारी कार्यालयों में आवेदन भी दे चुके है , लेकिन सरकार की तरफ से इस मामले पर अब तक कोई सुध नही लिया गया है ।

बरसात में भूखे सोने में मज़बूर ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है की इलाज के लिए इस नदी को पार करके ही जाना पड़ता है , बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है , बरसात के दिनों में नदी में बाढ़ आ जाने से बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते है , लोग किसी भी काम के लिए किराना सामान , खाद्य पदार्थ या राशन जैसे अन्य आवश्यक सामग्री को लेकर खरीपथरा , दाबरीगुड़ा , अमलीपदर जाते है ,लेकिन कोतराडोंगरी से लगे रास्ते में नदी पर पुल नहीं बनने के कारण ये गांव आज तक विकास से कोसों दूर है , कई बार ग्रामवासी अनियंत्रित बारिश से भूखे पेट सोकर दिन गुजारे है,  स्थानीय लोगों ने कई बार यहां के सरकारी अधिकारी एवं नेता – राज नेता से इस नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर अवगत करा चुके है , लेकिन आज तक पुल नहीं बन पाया , अधिकारीयों व नेताओं का सिर्फ आश्वासन देने तक का शिमित है , इसके आगे कोई ध्यान नही दिया जाता

 

विधायक पुजारी आये थे 2019 में

 

ग्रामीणों का यह भी कहना है , की बिन्द्रानवागढ़ विधायक स्वयं अगस्त 2019 में इस तेज धार नदी को आकर देख चुके , उन्होंने इस तेज धार वाली नदी में जल्द – जल्द से पुल या रपटा बनाने की भी ग्रामणों को आश्वासन दिया था , लेकिन अब तक तीन वर्ष होने को जा रहा फिर भी कोई नेता या राजनेता यहाँ के मासूम ग्राम वासियों की समस्या को नही समझ रहै है , आखिर कब तक चलेगा यह शिलशिला कब तक लोग अपनी जान हथेली पर रखकर करते रहेंगे करेंगे खतरनाक तेज धार वाली नदी से आवाजाही , अगर इस मार्ग पर पुल या रपटा नही बनाया गया तो आने वाले समय पर अनेक दुर्घटना होने की संभावना के साथ लोगों का सरकार से भरोसा ही टूट जाएगा।