
परपोडा में धूमधाम से मनाया गया श्री राम उत्सव
बेमेतरा – अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा के शुभावसर को लेकर पिछले कई दिनों से लटटी बाबा धाम परपोड़ा में भी उत्सव की व्यापक तैयारियां की जा रही थी। घरों, मंदिरों की साज-सज्जा के साथ प्रभु श्री रामलला के मंदिर में विराजित होने और जनसामान्य को दर्शन देने का हर कोई बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था। इस आयोजन के उल्लास और उमंग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैैं कि ग्राम परपोड़ा भगवामय नजर आ रहा था, पिछले एक पखवाड़े से रामभक्तों के द्वारा प्रतिदिन प्रभात फेरी निकाल कर सांयकाल अयोध्या से आये अक्षत कलश पूजन साथ ही घर घर अक्षत व राम मंदिर के निमंत्रण दिया गया। वही परपोड़ा के ह्रदय स्थल राम मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया था, जहाँ दिनभर पूजा पाठ करने के लिए श्रद्धालु पहुँचे।
रामभक्त नीरज सिंह राजपूत ने बताया 21 जनवरी रात कोतवाल के माध्यम से पूरा गांव को बता दिया गया था कि 22 जनवरी को त्योहार मनाना है। पूरा गांव इस दिन भगवामय और रामभक्ति में डूबा था। हर घर से भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर को धूम धाम से मनाने के लिए भरपूर सहयोग मिला चाहे अन्न अर्थ पारिश्रमिक सब सहयोग मिला जिसमे एक छोटे बच्चे से लेकर वृद्ध जन शामिल थे। 22 जनवरी को प्रत्येक दिन की तरह सर्व प्रथम प्रभातफेरी निकाला गया इनके बाद पाठ किया गया। रामायण पाठ हनुमान मंदिरों में भी किया गया। उनके बाद 11 बजे से विधि विधान से राम मंदिर में प. रिंकू शर्मा द्वारा सभी राम भक्तों को पूजा पाठ कराया गया। इनके बाद मातृशक्ति के द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाला गया छोटे छोटे बच्चे को राम लक्ष्मण सीता हनुमान बने थे, उनके इस रूप से पूरा दृश्य बड़ा मनोरम लग रहा था। इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गडुवा बाजा दूसरी तरफ भजन मंडली और तीसरी तरफ डीजे के साथ यह यात्रा पूरे गाँव भ्रमण किया जहां हर एक मोहल्ले को तोरण पताका से सजाया गया था। साफ सफाई करके रखा गया था यात्रा जैसे ही मोहल्ले में पहुँचती श्रद्धालु नाचते गाते झूमते नजर आते थे शाम को हर घर में दीपावली की तरह दीप जलाए गए। बाजार चौक परपोड़ा में व कई मोहल्ला में भगवा ध्वज फहराया गया जिसमें दीप दान कराया गया वह बड़ा मनोरम था। अंतिम में पूरा गांव बाजार चौक परपोड़ा में श्री रामलला की भव्य आरती भी की गई। इसके साथ ही गृह ग्राम परपोड़ा के रामायण मंडली द्वारा भक्ति गीतों की ऐसी ताल छेड़ी की श्रद्धालु झूमते रहें।












