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वर्मी कम्पोस्ट के प्रयोग से लहलहाएगी फसल- डाॅ. गौरव कुमार सिंह

गोपाल सिंह विद्रोही प्रदेश प्रमुख छत्तीसगढ़_आज सूरजपुर_कलेक्टर डाॅ. गौरव कुमार सिंह ने जिले के किसानो को अपनी फसलो के लिए वर्मी कम्पोस्ट को बेहतर मानते हुए जैविक खेती में वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करने कि अपील की है। जिससे फसल लहलहाएगी और अधिक उत्पादन होगा। कलेक्टर ने बताया कि सालो पहले इन्ही गोबर खादो का प्रयोग प्रमुखता से किया जाता था तब फसलो का उत्पादन काफी अच्छा होता था। वर्मीकम्पोस्ट में साधारण मृदा की तुलना में 5 गुना अधिक नाइट्रोजन, 7 गुना अधिक फॉस्फेट, 7 गुना अधिक पोटाश, 2 गुना अधिक मैग्नीशियम व कैल्शियम होते हैं। प्रयोगशाला जाँच करने पर विभिन्न पोषक तत्वों की मात्रा में नाइट्रोजन 1.0-2.25 प्रतिशत, फास्फोरस 1.0-1.50, प्रतिशतनाइट्रोजन 2.5-3.00 प्रतिशत होता है।
कलेक्टर डाॅ. गौरव कुमार सिंह ने जिले के किसानो को प्रेरित करते हुए बताया कि वर्मी कम्पोस्ट एक अच्छी किस्म की खाद है इसके अनेक लाभ है जिसमें प्रमुख रुप से वर्मी कम्पोस्ट को भूमि में बिखेरने से भूमि भुरभुरी एवं उपजाऊ बनती है। इससे पौधों की जड़ों के लिये उचित वातावरण बनता है। जिससे उनका अच्छा विकास होता है। भूमि एक जैविक माध्यम है तथा इसमें अनेक जीवाणु होते हैं जो इसको जीवन्त बनाए रखते हैं इन जीवाणुओं को भोजन के रूप में कार्बन की आवश्यकता होती है। वर्मी कम्पोस्ट मृदा से कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि करता है तथा भूमि में जैविक क्रियाओं को निरन्तरता प्रदान करता है। वर्मी कम्पोस्ट में आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर व सन्तुलित मात्रा में होते हैं जिससे पौधे सन्तुलित मात्रा में विभिन्न आवश्यक तत्व प्राप्त कर सकते हैं।
वर्मी कम्पोस्ट के प्रयोग से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है जिससे उसमें पोषक तत्व व जल संरक्षण की क्षमता बढ़ जाती है व हवा का आवागमन भी मिट्टी में ठीक रहता है। वर्मी कम्पोस्ट क्योंकि कूड़ा-करकट, गोबर व फसल अवशेषों से तैयार किया जाता है जिससे गन्दगी में कमी होता है तथा पर्यावरण भी सुरक्षित रहती है। वर्मी कम्पोस्ट टिकाऊ खेती के लिये बहुत ही महत्त्वपूर्ण है तथा यह जैविक खेती की दिशा में एक नया कदम है। इस प्रकार की प्रणाली प्राकृतिक प्रणाली और आधुनिक प्रणाली जो कि रासायनिक उर्वरकों पर आधारित है, के बीच समन्वय और सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।
वर्मी कम्पोस्ट से खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं। इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं। मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं। यह कचरा, गोबर तथा फसल अवशेषों से तैयार किया जाता हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता हैं।
कलेक्टर ने कहा कि गोधन न्याय योजना से उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किसानो के अतिरिक्त कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी, बीज निगम व रेशम पालन सहित अन्य विभाग विभागीय योजनाओ से लाभान्वित होने के लिए वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने के लिए कहा है।

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