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मातृ मृत्यु दर में कमी लाने एवं माता तथा बाल स्वास्थ्य पर संभाग स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

मातृ मृत्यु दर में कमी लाने एवं माता तथा बाल स्वास्थ्य पर संभाग स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

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अम्बिकापुर//संभाग स्तरीय मातृ मृत्यु स्वास्थ्य संबंधी कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को अम्बिकापुर में सम्पन्न किया गया। संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवायें डॉ पीएस सिसोदिया के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर.एन.गुप्ता ने मातृ मृत्यु दर के बारे में बताते हुए कहा कि मातृ मृत्यु दर महिला एवं बाल स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न देशों और संस्कृतियों में मातृ मृत्यु के भिन्न-भिन्न कारण हैं, तथा इसका प्रभाव विभिन्न राज्य में जिले के मातृ मृत्यु दरों में झलकता है।
डीपीएम डॉ पुष्पेन्द्र राम ने बताया कि दुनिया के कुछ क्षेत्रों में मातृ मृत्यु की उच्च संख्या गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में असमानता को दर्शाती है। मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने हेतु चिकित्सकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। अब प्रधानमंत्री मातृत्व स्वास्थ्य योजना के तहत प्रत्येक माह के 09 तारीख को गर्भवती माताओं की स्वास्थ्य केन्द्रों में शिविरों मे माध्यम से निःशुल्क जांच की जा रही है। गर्भवती माताओं की जानकारी रखने मितानिनों, एएनएम के माध्यम से स्वास्थ्य केन्द्रों में जानकारी पूर्व में अपडेट करना आवश्यक है जिससे कि उच्च जोखिम गर्भवती माताओं का चिन्हांकन करते हुए उन्हें तत्काल स्वास्थ्य सेवायें प्रदाय की जा सके। इससे माता एवं बच्चें दोनों की जान के जोखिम में कमी आयेगी।
जिला नोडल डॉ रोजलीन आर एक्का ने बताया कि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान और उसके बाद जटिलताओं के परिणामस्वरूप महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। इनमें से अधिकांश जटिलताएँ गर्भावस्था के दौरान विकसित होती हैं और अधिकांश को रोका जा सकता है या उनका इलाज किया जा सकता है। आज देश भर में सुरक्षित मातृत्व अश्वासन (सुमन) कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में जाने वाली हर मां और नवजात शिशु को बिना किसी कीमत के गारंटीकृत, गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान स्वास्थ्य केन्द्रा में किया जाना है।
राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ अनुराग मिंज ने कार्यशाला में बताया कि मातृ मृत्यु के बढ़ते आकड़ों को कम करने हेतु चिकित्सा अधिकारियों को ऑडिट नियमित रूप से किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि देश की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए प्रमुख मेट्रिक्स में से एक मातृ मृत्यु अनुपात है। मातृ मृत्यु दर को कम करने के प्रयासों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत की पहले ही सराहना की जा चुकी है। भारत ने पिछले 20 वर्षों में मातृ मृत्यु को कम करने में प्रभावशाली प्रगति की है, लेकिन अभी भी उच्च एमएमआर वाले राज्यों के साथ ही जिले के अंतिम छोर पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
सुश्री अभिलाषा शर्मा रात्रे द्वारा मातृ मृत्यु अंकेक्षण तथा विकासखण्ड स्तर से डाटा का संधारण करने साफ्टवेयर का प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ आमीन फिरदौसी ने किया, कार्यशाला में डॉ पार्थ, श्री रूद्रप्पा, डॉ प्रीति, सुश्री अभिलाषा जपाईगो एवं संभाग के समस्त जिले एवं विकासखण्ड से आये बीएमओ, एमओ, डाटा प्रबंधक उपस्थित थे।

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