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भीषण गर्मी चिलचिलाती धूप

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मवेशी, पक्षी, हर व्यक्ति चिल्लाती धूप एवं भीषण गर्मी से परेशान

जल श्रोत सूखे हैंड पंप, सबमर्सिबल पंप दिया जवाब

स्कूली बच्चे बेहाल पलकों ने कलेक्टर से विद्यालयों में अवकाश घोषित करने मांग की

गोपाल सिंह विद्रोही//प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़//विश्रामपुर – भीषण गर्मी से बच्चे ,बुजुर्ग, हर उम्र के लोग ,मजदूर, जानवर सभी सभी का जीना मुश्किल हो गया है। सूरज की तप तपआती प्रचंड रूप से वनस्पति एवं प्राणियों का जीना मुश्किल हो गया है। तापमान 39 से 41 डिग्री तक पहुंच जा रहा है, सभी का घर से निकलना मुश्किल हो गया है,सड़के सुनी हो गई है, दुकानों का सट्टर गिर गया है, ऐसी भीषण गर्मी में बच्चों का स्कूल आना जाना जोखिम भरा काम हो गया है।पलक चिंतित अपने बच्चो के स्वस्थ को ले कर काफी चिंतित है।

जानकारी के अनुसार एक सप्ताह से गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाने लगा है। जानवर एवं इंसानों का जीना मुश्किल हो गया है। जल स्रोत सूखने की स्थिति में पहुंच गई है ।ऐसी भीषण गर्मी में मजदूरों का रोज कमाना खाना जानलेवा साबित हो रहा है । मजदूरों कि विवस्था उन्हें रोजी-रोटी कमाने के लिए मजबूर कर दे रहा है ।जानकारी के अनुसार इन दिनों भीषण गर्मी का प्रभाव देखा जा रहा है ।नदी नाले सूख गया है। नगर पंचायत बिश्रामपुर के साथ-साथ आसपास की सभी ग्राम पंचायत के सबमर्सिबल पंप अंतिम सांस लेने लगा है । प्राणदायिनी रिहंद नदी भी सूखने लगी है ।जल धारा पतली हो गई है, जिससे आने वाला समय और विकराल होने की पूरी संभावना है ।जानवर पक्षी जल बिना व्याकुल है ।लोग पालतू जानवरों को घर से बाहर छोड़ दे रहे हैं परंतु उन्हें घर से बाहर पानी की बिना तड़पना पड़ता है । ऐसी स्थिति में पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने पालतू मवेशियों को घर से बाहर न जाने दे ,उन्हें बांध कर रखें ।समय पर पर उन्हें पीने के लिए जल उपलब्ध कराए ।

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*पालकों ने जिला कलेक्टर से विद्यालयों में छुट्टी करने की मांग की है*
भीषण गर्मी में बच्चों को विद्यालय भेजने में माता-पिता आना-कानी कर रहे हैं, उनका मानना है कि इस भीषण गर्मी में बच्चे लूट के चपेट में आ कर बीमार पड़ सकते हैं, ऐसी स्थिति में जिला कलेक्टर को चाहिए कि जिले के समस्त विद्यालयों को ग्रीष्म ऋतु में होने वाली अवकाश से पूर्व ही छुट्टी कर दें। बच्चे अपने घरों में ही रह कर विद्यालय के दिए हुए गृह कार्य को आसानी से कर सकते हैं ताकि उन्हें गर्मी से बचाया जा सकता है। जिला कलेक्टर को चाहिए कि भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित करने का आदेश दे दे।
उल्लेखनीय है कि डी ए वी पब्लिक स्कूल में बच्चों के लिए विद्यालय सुबह 7 बजे से 11 बजे तक विद्यालय संचालित हो रही है जबकि विद्यालय में शिक्षकों को 6:45 से 1:40 तक आने-जाने की आदेश है .यह समय भीषण गर्मी का समय है जिससे बच्चे तेज गर्मी के चपेट में फस जा रहे हैं। इसी तरह कारमेल कान्वेंट स्कूल एवं अन्य विद्यालयों में भी 7बजे से विद्यालय संचालित होती है जबकि 11 बजे के बाद बच्चों का अवकाश हो रही है जिससे बच्चे भीषण गर्मी में आने जाने हेतु मजबूर है और बीमार पड़ रहे है।
*गर्मी पड़े या तूफान पेट पालने के लिए घर से निकलना हमारी मजबूरी*
भीषण गर्मी के बीच रोजी-रोटी कमाने घर से निकले राजमिस्त्री छोटेलाल प्रजापति ,मधुर देव प्रसाद राजवाड़े ,परमानंद राजवाड़े निवासी करंजी ने इस भीषण गर्मी में काम के लिए घर से निकले है उनसे नवभारत ने पूछा कि भीषण गर्मी में आपको सभी को अपने बच्चों के साथ घर में रहना चाहिए । घर से निकले हो तो बीमार पड़ जाएंगे कम से कम भीषण गर्मी में अपने परिवार के साथ रहना चाहिए ताकि लू से बचा जा सके तो जवाब में इन मजदूरों ने कहा कि भीषण गर्मी पड़े या तेज बारिश हो या तूफान आए हर मौसम में हम सबको काम करना पड़ता है। काम करेगें तभी अपने बच्चों को भरण पोषण कर सकते हैं। इन मजदूरों ने कहा कि लोग अपने स्वार्थ के लिए पेड़ों की कटाई करते हैं। जल स्रोत को मिट्टी से भर देते हैं। कंक्रीट की सड़क एवं गगनचुंबी इमारत हो गई है ।नली,नाला5 कंकीरिट कि हो गई है। नाली का पाकीकरण हो गया है ।इन्हीं सब कारणों से भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इन मजदूरों ने एक पर्यावरणविद की तरह ग्रामीणों से ज्यादा शहरी लोगों को गर्मी पड़ने का कारण बताया। इन लोगों ने कहा कि अभी भी गांव मेंपेड़ एवं नदी नाले ज्यादा है जिससे वहां शहरो कि अपेक्षा गर्मी कम पड़ती है। शहरी लोगों को अभी से ही सबक लेकर नदी तालाब जल स्रोत को बढ़ाने हेतु ज्यादा से ज्यादा प्रयास करना चाहिए।

Ashish Sinha

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