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ज्योतिर्मयानंद ब्रह्मचारी ने ग्रहण की दंड संन्यास दीक्षा

ज्योतिर्मयानंद ब्रह्मचारी ने ग्रहण की दंड संन्यास दीक्षा

अब स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती के नाम से जाने जायेंगे

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बेमेतरा – जिला के ग्राम सलधा (बेरला) स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम के प्रभारी एवं जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज के कृपा पात्र शिष्य ज्योतिर्मयानंद ब्रह्मचारी आज 45 वर्ष की आयु में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी विक्रम संवत 2081 तद्नुसार 21 अप्रैल 2024 रविवार को ब्रह्म मुहूर्त में गंगा घाट काशी में उत्तराम्नाय ज्योतिशपिठाधिश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती “1008” महाराज से दंड संन्यास की दीक्षा ग्रहण किये। अब आप स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती के नाम से जाने जाएंगे और आप शंकराचार्य परंपरा को समर्पित हुए। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिला अंतर्गत बिरनपुर कला की पावन धरा में पौष कृष्ण दशमी विक्रम संवत 2036 को मां श्रीमती उर्वशी शुक्ला पिता भरतलाल शुक्ला के घर जन्मे बालक प्रभात का बचपन से ही धर्म ध्यान में रुचि रहा, वर्ष 2001 में 21 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के सानिध्य में काशी में संस्कृत, वेद, उपनिषद इत्यादि का अध्ययन कर शिक्षा ग्रहण किये, तत्पश्चात वर्ष 2010 हरिद्वार कुंभ में 30 वर्ष की आयु में ब्रह्मचारी दीक्षा ग्रहण ज्योतिर्मयानन्द ब्रह्मचारी कहलाए। बेमेतरा कबीरधाम जिला समेत पूरे छत्तीसगढ़ अंचल एवं संप्रदाय में हर्ष एवं उल्लास का माहौल व्याप्त हो गया हैं। आपके सांसारिक जीवन के माता-पिता श्रीमती उर्वशी शुक्ला एवं भरत लाल शुक्ला कवर्धा निवास करते हैं। मंझले भाई सुभाष शुक्ला तहसीलदार बेरला एवं छोटे भाई संदीप शुक्ला आरक्षक कबीरधाम पुलिस में कार्यरत हैं।

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