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चौथी पास राजा

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पिछले बरस दिल्ली की विधानसभा में एक कहानी सुनायी थी जिसका शीर्षक था, ‘चौथी पास राजा’। उनका इशारा साफ़ तौर पर देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा दीक्षा को लेकर था। मोदी जी ने ख़ुद अपने कई साक्षात्कारों और रैलियों में यह बात कही थी कि वे पढ़े लिखे इंसान नहीं हैं। उन्होंने लोकसभा में एक बार पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की हार्वर्ड की पढ़ाई लिखाई का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा था कि मैं हार्वर्ड में तो पढ़ा नहीं, मैं तो ‘हार्ड वर्क’ में शिक्षित दीक्षित हुआआ। यह एक खुली सच्चाई है कि वे किसी संस्था से कभी पढ़े ही नहीं हैं। इधर आम चुनाव की रैलियों में वे यह लगातार साबित कर रहे हैं कि उन्हें पढ़ना नहीं आता। वे कांग्रेस का घोषणापत्र भी ठीक से नहीं पढ़ पा रहे, और इसीलिए अपढ़ इंसान की तरह तुक्के लगाकर अपने भाषणों में ऐसे हवाले देते रहते हैं जिनका पूरे घोषणापत्र में कहीं उल्लेख ही नहीं है। रवीशकुमार ने अपने यूट्यूब चैनल पर उन सारे ‘झूठों’ को गिन गिन कर दर्शकों को दिखाया है। वे सारे ‘झूठ’ सांप्रदायिकता के घिनौने ज़हर से लबालब हैं, आर एस एस ने उनमें मुसलमानों और मार्क्सवादियों के ख़िलाफ़ जो नफ़रत की अमानवीय चेतना विकसित की है, उसे पागलों की तरह अब वे खुलकर अपने भाषणों में उजागर कर रहे हैं। इन तमाम चुनावी भाषणों में इस महान देश के ‘महान’ प्रधान मंत्री को अपने अपढ़ होने का डंका इस तरह पीटना इस पद की गरिमा के विरुद्ध है। हमारे देश और लोकतंत्र की पूरी दुनिया में बदनामी हो रही है। देश के मतदाताओं को देशहित में अब सही फ़ैसला लेना चाहिए, पूरे सम्मान के साथ ऐसे जनसेवक को अब इस गंभीर दायित्व से मुक्त कर देना चाहिए, यह अवसर उनकी विदाई वेला का हो, इसी में देश और देश के अवाम की भलाई है।

Ashish Sinha

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