ताजा ख़बरेंदेशब्रेकिंग न्यूज़

तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं, जानिए क्या बदला

तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं, जानिए क्या बदला

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
c3bafc7d-8a11-4a77-be3b-4c82fa127c77 (1)

दिल्ली: आज से देश में तीनों नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। आईपीसी (1860), सीआरपीसी (1973) और एविडेंस एक्ट (1872) को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने बदल दिया है। आज से केस नए कानून के तहत ही दर्ज होते हैं। धाराओं ने भी बदलाव किया है। हाल ही में चर्चा में आई नई धाराओं के बारे में जानें..।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) में 358 धाराएं हैं。 आईपीसी पहले 511 धाराएं थीं। BNS में २० नए अपराध हैं। 33 अपराधों में सजा का समय बढ़ा दिया गया है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा है। 83 अपराधों में जुर्माना अधिक है। छह अपराध सामुदायिक सेवा का प्रावधान करते हैं। 19 धाराएं अधिनियम से हटा दी गई हैं। 8 नए शब्द जोड़े गए हैं। 22 धाराएं खारिज कर दी गई हैं।

ऐसा ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में भी है, जिसमें कुल 531 धाराएं हैं। CRPC में 484 धाराएं थीं। BNSS में कुल 177 प्रावधानों का परिवर्तन हुआ है। इसमें नौ नई धाराएं और 39 नई उपधाराएं जोड़ी गई हैं। 44 नए नियम और विवरण जोड़े गए हैं। 35 सेक्शन में समय सीमा और ऑडियो-वीडियो प्रावधान शामिल हैं। 14 धाराएं पूरी तरह से खारिज कर दी गई हैं। भारत का साक्ष्य अधिनियम 170 धाराओं से बना है। 24 प्रावधानों को बदल दिया गया है। सात उप-धाराएं और दो नई धाराएं जोड़ी गई हैं। छह नियमों को हटाया गया है या हटाया गया है।

नए कानून में छीना-झपटी से जुड़े मामले में BNS की धारा 302 लागू होगी। धारा 302 आईपीसी में पहले हत्या का मामला था। ठीक उसी तरह, गैर कानूनी एकत्रीकरण पर भारतीय दंड संहिता की धारा 144 लागू होती है। धारा 187 अब इसका नाम होगा। IPC में मॉब लिंचिंग का उल्लेख नहीं था। इस अपराध के लिए अब उम्रकैद से मौत तक की सजा दी जा सकती है। बीएनएस की धारा 103(2) में इसकी व्याख्या दी गई है।

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

आतंकवादी अपराधों में मौत की सजा तक..।

भारत की सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता को खतरा पैदा करना आतंकवाद है। BNS की धारा 113 इसका उल्लेख करती है। भारतीय मुद्रा की तस्करी भी इसमें शामिल होगी। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर मौत की सजा या उम्रकैद की सजा दी जा सकती है। आतंकवादी साजिश रचने पर पांच वर्ष से लेकर उम्रकैद की सजा हो सकती है। आतंकवादी संगठन में शामिल होने पर उम्रकैद या जेल की सजा हो सकती है। आतंकियों को छिपाने पर तीन साल से लेकर उम्रकैद की सजा दी जा सकती है। नुकसान भी हो सकता है।

राजद्रोह अधिनियम नहीं

BNS में राजद्रोह को लेकर अलग श्रृंखला नहीं है। यानी राजद्रोह समाप्त हो गया है। नए कानून ने “राजद्रोह” को “देशद्रोह” में बदल दिया है। राजद्रोह का कानून IPC की धारा 124A में है। नए कानून में देशद्रोह देश की संप्रभुता को चुनौती देने और अखंडता पर हमला करने या खतरा पहुंचाने का अर्थ है। धारा 147–158 में देशद्रोह की व्याख्या दी गई है। धारा 147 कहती है कि देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर फांसी या उम्रकैद की सजा होगी। धारा 148 में इस तरह की साजिश करने वालों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, साथ ही हथियार इकट्ठा करने या युद्ध की तैयारी करने वालों के खिलाफ धारा 149 लगाने का प्रावधान है। धारा 152 में कहा गया है कि अगर कोई जानबूझकर लिखकर या बोलकर या संकेतों से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रदर्शन करके ऐसी हरकत करता है, जिससे विद्रोह फूट सकता हो, देश की एकता को खतरा हो या अलगाव और भेदभाव को बढ़ावा देता हो तो ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर अपराधी को उम्रकैद या फिर 7 साल की सजा का प्रावधान है।

Ashish Sinha

e6e82d19-dc48-4c76-bed1-b869be56b2ea (2)
WhatsApp Image 2026-01-04 at 4.02.37 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.36.04 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.39.12 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.44.45 PM (1)

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!