
महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़: बेटी की पढ़ाई के लिए सुकन्या समृद्धि में निवेश कर रही हैं ये ग्रामीण महिला
"कांकेर के पहाड़ी गांव तुलतुली की मायाबती हिचामी महतारी वंदन योजना से मिल रही राशि का अनूठा उपयोग कर रही हैं। जानें कैसे 1000 रुपये की मदद से वे अपनी बेटी का भविष्य संवार रही हैं और बच्चों के पोषण का ध्यान रख रही हैं।"
पहाड़ी गांव तुलतुली में बदलाव की बयार: महतारी वंदन की राशि से बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि में निवेश कर रहीं मायाबती
कांकेर विकासखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बसा गांव तुलतुली आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। कभी नक्सल गतिविधियों के साये में रहने वाला यह गांव आज शासन की योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं से सराबोर है। जो ग्रामीण कभी बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से अनजान थे, आज वे खुद आगे बढ़कर इनका लाभ ले रहे हैं।
— मायाबती हिचामी, हितग्राही
ग्राम तुलतुली की निवासी मायाबती हिचामी इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। दो बच्चों की माँ मायाबती बताती हैं कि उनकी बेटी गुड़िया चौथी कक्षा में है और बेटा आंगनवाड़ी जाता है। पहले संसाधनों की कमी के कारण बच्चों की शिक्षा और पोषण को लेकर वे हमेशा चिंतित रहती थीं, लेकिन महतारी वंदन योजना ने उनकी मुश्किलों को आसान कर दिया है।
योजना का समझदारी से उपयोग
मायाबती इस योजना से मिलने वाली राशि का बहुत ही सुनियोजित ढंग से उपयोग कर रही हैं। वे भविष्य की बचत और वर्तमान की जरूरत के बीच संतुलन बना रही हैं। वे प्रति माह मिलने वाली 1000 रुपये की राशि में से 500 रुपये सुकन्या समृद्धि योजना में अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए निवेश कर रही हैं। शेष 500 रुपये का उपयोग बच्चों के बेहतर खान-पान और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में योजनाओं की पहुंच बढ़ने से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। मायाबती जैसे जागरूक हितग्राही अब न केवल योजना का लाभ ले रहे हैं, बल्कि भविष्य के लिए बचत की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। तुलतुली की यह कहानी छत्तीसगढ़ के सुदूर क्षेत्रों में पहुंच रही शासन की योजनाओं की सफलता का प्रमाण है।
दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसने के बावजूद अब ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ी है। मायाबती ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन और प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।












