केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की अंतिम तैयारी पूरी, इन्हें मिल सकता है मौका

सोनोवाल को नेतृत्व ने दिल्ली किया तलब, सिंधिया को भी राजधानी में ही रहने का निर्देश
उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान में रखकर हो सकता है विस्तार

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मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार की अंतिम तैयारी पूरी हो गई है।

सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार में व्यापक फेरबदल होगा। वर्तमान में केंद्रीय मंत्रिमंडल में 53 मंत्री हैं। संविधान के मुताबिक अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस हिसाब से मंत्रिमंडल में 28 और लोगों को समायोजित किया जा सकता है। विस्तार में एनडीए के सहयोगी दलों में से अपना दल और अन्नाद्रमुक को भी जगह मिलेगी। लेकिन जदयू को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार में एक दर्जन मंत्रियों की छुट्टी होगी और करीब इतनी ही संख्या में मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया जाएगा। चूंकि वर्तमान में 28 मंत्रियों को नई टीम में शामिल करने का विकल्प बचा है। ऐसे में दो दर्जन नए चेहरों को भी विस्तार में टीम मोदी में जगह मिलेगी।

जदयू को तीन पदों का नया प्रस्ताव, नीतीश ने नहीं खोले पत्ते
एनडीए के सहयोगी दल जदयू को सरकार में शामिल होने के लिए दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद देने का नया प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन जदयू विस्तार में शामिल होगा या नहीं, यह बिहार के सीएम नीतीश कुमार के रुख पर निर्भर करेगा। नीतीश मंत्रिमंडल में पांच पद मांग रहे हैं। उन्होंने नए प्रस्ताव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

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यूपी समेत सभी चुनावी राज्यों पर नजर
विस्तार पर पीएम मोदी की निगाहें उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर होगी। चर्चा है कि इस विस्तार के जरिए पार्टी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं को खास तौर पर रिझाएगी।

ऐसे में रीता बहुगुणा जोशी, वरुण गांधी और रमापति राम त्रिपाठी में से, किन्हीं दो को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चा है। इसके अलावा दलित बिरादरी को संदेश देने के लिए रमाशंकर कठेरिया और मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए जफर इस्लाम को मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं भी जताई जा रही है।

नौ मंत्रियों पर अभी काम का अतिरिक्त बोझ
रामविलास पासवान और सुरेश अंगड़ी के निधन और राजग के सहयोगी रहे शिवसेना और अकाली दल के कोटे के मंत्रियों के इस्तीफे के कारण फिलहाल नौ मंत्रियों के पास अतिरिक्त मंत्रालयों का भी बोझ है। इनमें नितिन गडकरी, प्रकाश जावड़ेकर, स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल, हरदीप पुरी, रविशंकर प्रसाद, धर्मेंद्र प्रधान और हर्षवर्धन शामिल हैं। विस्तार में इन मंत्रियों के काम का बोझ हल्का किए जाने की चर्चा है।

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