बस्तर ओलम्पिक 2024 : पारम्परिक खेल विधा तीरंदाजी में दूरस्थ ईलाके की महिलाओं ने मारी बाजी

बस्तर ओलम्पिक 2024 : पारम्परिक खेल विधा तीरंदाजी में दूरस्थ ईलाके की महिलाओं ने मारी बाजी

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कारी कश्यप और हेमबत्ती कश्यप ने कहा जीतने से ज्यादा बस्तर ओलंपिक स्पर्धा में सहभागिता निभाना सबसे अधिक महत्वपूर्ण

जगदलपुर/ बस्तर ओलंपिक 2024 में युवा वर्ग, ग्रामीणों के साथ-साथ महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने भी स्पर्धा में उत्साहपूर्वक भाग लिया, ग्रामीण महिलाओं ने तो पारम्परिक खेल विधा में पूरा दमखम दिखाई और पहला एवं दूसरा स्थान हासिल किया। बस्तर ओलम्पिक के जिला स्तरीय आयोजन के तीरंदाजी विधा अंतर्गत ओपन वर्ग में 50 मीटर स्पर्धा के तहत लोहण्डीगुड़ा की कारी कश्यप ने प्रथम, दरभा की हेमबत्ती कश्यप ने द्वितीय तथा बास्तानार की जगोबाई ने तृतीय स्थान हासिल कर बाजी मारी। वहीं ओपन वर्ग के 30 मीटर स्पर्धा में जगदलपुर की अंजलि कश्यप ने पहला, लोहण्डीगुड़ा की कारी कश्यप ने दूसरा और जगदलपुर की भूमिका गोयल ने तीसरा स्थान अर्जित किया। इस दौरान कारी कश्यप और हेमबत्ती कश्यप ने अपने प्रदर्शन से लबरेज होकर कहा कि स्पर्धा में जीतने से ज्यादा सहभागिता निभाना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इन दोनों ने बताया कि पढ़ाई के दौरान 2006 से 2011 तक निरन्तर तीरंदाजी विधा में हिस्सा ले रहे थे लेकिन अभी केवल घर में पारम्परिक तीर-कमान से अभ्यास करने के बावजूद बढ़िया प्रदर्शन से वे उत्साहित हैं। कारी ने संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक में भी उम्दा प्रदर्शन किए जाने की बात कही।

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ग्रामीण खेलों को मिला नया मंच

बस्तर ओलंपिक में परंपरागत खेलों तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी और रस्साकशी जैसे खेलों का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के पहल पर बस्तर संभाग में न केवल खेल कौशल को निखारने का एक मंच बना, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को उजागर करने के साथ ही मुख्य धारा से जोड़ने का भी अवसर देना था। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व के रूप में देखा। ग्रामीणों और महिलाओं की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और समर्थन मिलने पर ये क्षेत्र भी प्रगति की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं।