राजिम कुंभ कल्प: संत समागम में हो रहे भागवत महापुराण कथा का पूर्णाहुति के साथ समापन

राजिम कुंभ कल्प: संत समागम में हो रहे भागवत महापुराण कथा का पूर्णाहुति के साथ समापन

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गरियाबंद/राजिम कुंभ कल्प मेला के संत समागम परिसर में 13 से 19 फरवरी तक श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया गया। कथा वाचक डा. संजय कृष्ण सलिल महाराज ने 7 दिनों तक कुंभ मेले में भक्ति भाव की गंगा बहा दी। उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि भागवत लोगों को कल्याणार्थ मोक्ष प्रदान करने वाला है। सनातन धर्म में भागवत ऐसा ग्रंथ है, जो जीने की कला नहीं, अपितु मरने की भी कला सिखाती है। राजा परीक्षित को जब ज्ञात हुआ कि उनकी मृत्यु सातवें दिन निश्चित है, तब उन्होंने अपने कल्याणार्थ सुखदेव जी महाराज से भागवत कथा का शुद्ध अंतःकरण से श्रवण कर मोक्ष को प्राप्त किया। आज के दौर में भागवत कथा प्रासंगिक है क्योंकि जीवन के संघर्ष में व्यक्ति अपनी मृत्यु भूल गया है, जो अटल सत्य है। भागवत उसे मृत्यु के भय से मुक्त कर उसका मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत भक्त और भगवान के बीच कड़ी जोड़ने का काम करती है। यह भक्त और भगवान की कथा है, जिसमें राम, कृष्ण और महाभारत के विशेष प्रसंगों का वर्णन है कि किसी प्रकार जीवन में संयम रखते हुए मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा है कि धर्म का आचरण करते हुए व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, तभी धर्म की स्थापना संभव है। कर्म प्रधान है, कर्म से ही व्यक्ति को अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त होता है। लोभ क्रोध से मुक्ति मिलती है। निर्मल मन से की गई भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
बुधवार को भागवत कथा का समापन पूर्णाहुति हवन पूजन के साथ संपन्न हुआ। भागवत कथा में उपस्थित पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प में लंबे अंतराल के बाद महाराज जी का कथा सुनने का सौभाग्य मिला है। आयोजन को सफल बनाने में उप संचालक प्रतापचंद पारख समेत प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी जुटे हुए थे। कथा का श्रवण करने प्रतिदिन भक्तों की भारी भीड़ रही।