बिहान योजना से बदली तकदीर: लखपति दीदी बनीं माधवी ओझा, आत्मनिर्भरता की मिसाल

बिहान योजना से बदली तकदीर: लखपति दीदी बनीं माधवी ओझा, आत्मनिर्भरता की मिसाल

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अंबिकापुर !आशीष सिन्हा ! 27..2.2025 ! छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिनमें से एक प्रमुख योजना है “बिहान”। यह योजना न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें एक सफल व्यवसायी बनने में भी सहायता कर रही है। इसी योजना की बदौलत अंबिकापुर विकासखंड के सरगंवा ग्राम पंचायत की रहने वाली माधवी ओझा आज “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। कभी सिर्फ घरेलू कार्यों में व्यस्त रहने वाली माधवी अब न केवल आर्थिक रूप से सक्षम हैं, बल्कि कई अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

माधवी ओझा का जीवन कभी भी आसान नहीं रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत सामान्य थी और घर चलाने के लिए कोई निश्चित आय का स्रोत नहीं था। वह अपने परिवार के साथ एक साधारण जीवन जी रही थीं, लेकिन मन में कुछ बड़ा करने की इच्छा थी। इसी दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार की बिहान योजना के बारे में पता चला, जो ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही थी।

इस योजना के तहत माधवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में उन्हें संकोच और झिझक महसूस हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने आत्मविश्वास हासिल किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें विभिन्न तरह के प्रशिक्षण दिए गए, जिनमें व्यवसाय प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता शामिल थी। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

बिहान योजना से जुड़े रहने के दौरान माधवी ओझा ने तीन लाख रुपये का लोन लिया और अपने व्यवसाय की नींव रखी। उन्होंने एक छोटी सी दुकान खोली, जिसमें प्रारंभ में किराना और घरेलू सामान बेचा जाता था। धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और इसे एक मल्टी शॉप में बदल दिया, जहाँ कपड़े, बर्तन, किराना और सिलाई की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।

उनकी मेहनत और लगन ने जल्दी ही रंग दिखाया। कुछ ही समय में उनकी दुकान अच्छी चल पड़ी और उन्होंने अपने पहले लोन को चुका दिया। अब उनकी आमदनी पहले की तुलना में कई गुना अधिक हो गई थी, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। उन्होंने अपने बच्चों को अच्छे प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलाया और अपने घर को बेहतर बनाने में भी योगदान दिया।

माधवी की कड़ी मेहनत और सफलता ने उन्हें गाँव में एक अलग पहचान दिलाई। लोग उन्हें अब “लखपति दीदी” के नाम से जानते हैं। उनकी सफलता को देखते हुए अन्य महिलाएँ भी उनसे प्रेरणा ले रही हैं और बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

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माधवी ने हाल ही में अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए दो लाख रुपये के नए लोन के लिए आवेदन किया है। इस राशि से वह अपनी मल्टी शॉप में और अधिक सामान लाने की योजना बना रही हैं, ताकि गाँव के लोगों को हर आवश्यक वस्तु उनके नजदीक ही उपलब्ध हो सके।

बिहान योजना ने छत्तीसगढ़ की हजारों महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान भी दी है। सरकार द्वारा संचालित यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती है और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इस योजना के तहत महिलाओं को समूह बनाकर विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षित किया जाता है और उन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

बिहान योजना के तहत सरकार निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान करती है:

स्वयं सहायता समूह (SHG) का गठन और संचालन

व्यवसायिक प्रशिक्षण और वित्तीय साक्षरता

लोन एवं अन्य वित्तीय सहायता

मार्केटिंग और बिजनेस एक्सपेंशन की जानकारी

अन्य महिलाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश

माधवी ओझा का मानना है कि यदि महिलाएँ आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं, तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने अन्य महिलाओं से आग्रह किया कि वे भी बिहान योजना से जुड़कर अपने जीवन को एक नई दिशा दें। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उन्हें एक नई पहचान दी है और उनके जीवन को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

समाज में सकारात्मक बदलाव

माधवी की सफलता से उनके गाँव और आसपास के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। अन्य महिलाएँ भी अब घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। गाँव में कई अन्य महिलाओं ने भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

सरकार भी इस योजना को और प्रभावी बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। स्वयं सहायता समूहों को और अधिक सहयोग देने के लिए नई योजनाएँ लाई जा रही हैं और बैंकिंग सुविधाओं को सरल बनाया जा रहा है, ताकि महिलाएँ आसानी से लोन प्राप्त कर सकें।

माधवी ओझा की कहानी यह साबित करती है कि इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति सफलता की ऊँचाइयों को छू सकता है। बिहान योजना के तहत उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत की और अब “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। उनकी यह सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना ने यह दिखाया है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने से न केवल उनका जीवन सुधरता है, बल्कि पूरा समाज आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होता है। यदि अधिक से अधिक महिलाएँ इस योजना से जुड़ें, तो निश्चित रूप से गाँव और शहरों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।