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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता, सुकमा में दो नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता, सुकमा में दो नक्सली ढेर

रायपुर, 2 मार्च 2025: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की लड़ाई अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता मिली है, जहां सुकमा जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए। बस्तर रेंज में बीते 60 दिनों के भीतर 67 हार्डकोर नक्सलियों का सफाया किया गया है। इस कार्रवाई को नक्सलवाद के विरुद्ध जारी अभियान की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

राज्य के मुख्यमंत्री ने सुरक्षाबलों के साहस, निष्ठा और प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब से राज्य में डबल इंजन सरकार बनी है, नक्सलवाद के खात्मे के लिए चलाए जा रहे अभियान को नई गति और दिशा मिली है। यह लड़ाई अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। बीते 13 महीनों में सरकार और सुरक्षाबलों के संयुक्त प्रयासों से 300 से अधिक नक्सली मारे गए, 985 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 1177 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।

सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसमें सख्त कार्रवाई के साथ-साथ विकास कार्यों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। हाल के वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की तैनाती को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। हाल ही में राज्य सरकार ने केंद्रीय बलों के साथ समन्वय बनाकर ऑपरेशन को तेज किया है। इस अभियान के तहत कई बड़े नक्सली कमांडरों को ढेर किया गया है, जिससे संगठन की गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है।

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प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के संकल्प के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का संपूर्ण रूप से अंत करने की योजना बनाई गई है। राज्य सरकार और सुरक्षाबलों की संयुक्त रणनीति से नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार किया जा रहा है। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक नक्सलवाद की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।

पिछले कुछ वर्षों में जनता का झुकाव सरकार की नीतियों और विकास योजनाओं की ओर अधिक हुआ है। कई नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने लगे हैं। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार के अवसर प्रदान करना है।

इस अभियान के कारण अब बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे क्षेत्रों में भी शांति बहाली की उम्मीद जगी है। जहां पहले इन इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव था, वहां अब विकास परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षाबलों के संयुक्त प्रयासों से नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

राज्य में नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे इस अभियान की सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार और सुरक्षाबल सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अगले कुछ महीनों में इस लड़ाई को पूरी तरह से समाप्त करने की योजना बनाई गई है, ताकि छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाया जा सके। सरकार का संकल्प है कि विकास और सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता देकर राज्य को उन्नति की ओर अग्रसर किया जाए।

यह सफलता इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

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