पुष्पा 3 की तर्ज पर यूकेलिप्टस तस्करी का भंडाफोड़, प्रशासन की नींद टूटी”

पुष्पा 3 की तर्ज पर यूकेलिप्टस तस्करी का भंडाफोड़, प्रशासन की नींद टूटी”

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
c3bafc7d-8a11-4a77-be3b-4c82fa127c77 (1)

सूरजपुर में यूकेलिप्टस तस्करी पर प्रशासन की सख्ती, 50 टन लकड़ी जब्त

सूरजपुर, 02 मार्च 2025 – चर्चित फिल्म पुष्पा में जिस तरह लाल चंदन की तस्करी का संगठित गिरोह दिखाया गया था, ठीक उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में यूकेलिप्टस की लकड़ी की अवैध तस्करी का खुलासा हुआ है। लंबे समय से चल रहे इस गोरखधंधे पर स्थानीय मीडिया द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और छापेमारी कर 50 टन यूकेलिप्टस की लकड़ी जब्त की गई।

इस तस्करी के पीछे बाहरी राज्यों से आए लोगों का बड़ा नेटवर्क सामने आ रहा है, जो स्थानीय लोगों से मिलीभगत कर इस अवैध कारोबार को चला रहे थे। प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही के चलते यह मामला तूल पकड़ चुका था और आखिरकार, मीडिया के दबाव के बाद संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई शुरू की गई।

कैसे चल रहा था यूकेलिप्टस तस्करी का खेल?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बाहरी राज्यों से आए तस्करों ने सूरजपुर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर यूकेलिप्टस की लकड़ी की कटाई शुरू कर दी थी। तस्करी का यह खेल पूरी तरह संगठित था, जहां स्थानीय दलालों और कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से अस्थाई डिपो बनाए गए थे।

इन डिपो में बड़े पैमाने पर लकड़ी इकट्ठी की जाती थी और फिर ट्रकों के माध्यम से इसे अन्य राज्यों में भेजा जाता था। इस दौरान कई बार प्रशासन को इसकी जानकारी मिली, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

हाल ही में मीडिया में इस पूरे मामले को प्रमुखता से उजागर किया गया, जिससे प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा। आखिरकार, संयुक्त टीम बनाकर छापेमारी की गई और भारी मात्रा में लकड़ी बरामद की गई।

प्रशासन की कार्यवाही – जब्त किए गए ट्रक और मशीनें

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने जिन स्थानों पर छापेमारी की, वहां से न केवल लकड़ी जब्त की गई, बल्कि तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन और मशीनें भी पकड़ी गईं।

जब्त की गई संपत्तियां:

50 टन यूकेलिप्टस की लकड़ी

लकड़ी लोड करने के लिए उपयोग किए जा रहे हाइड्रा क्रेन

तस्करों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ट्रक

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

हालांकि, इस मामले में एसडीएम शिवानी जायसवाल का कहना है कि प्रशासन द्वारा जब्त की गई लकड़ी की मात्रा मात्र 20 क्विंटल है। लेकिन स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आंकड़ा प्रशासन द्वारा कम करके बताया जा रहा है, जबकि हकीकत में जब्त लकड़ी की मात्रा 50 टन के करीब थी।

क्या कह रही हैं एसडीएम शिवानी जायसवाल?

जब इस संबंध में एसडीएम शिवानी जायसवाल से सवाल किए गए तो उन्होंने कहा,
“हमने तस्करी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और भविष्य में इसे और सख्त किया जाएगा। अस्थाई डिपो पर भी कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार कार्रवाई की जा रही है।”

उन्होंने यह भी बताया कि कलेक्टर ने डीएफओ (वन विभाग) को पत्र लिखकर इस मामले की पूरी जांच करने और तस्करी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

तस्करों के खिलाफ आगे की कार्रवाई

वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम तस्करों के खिलाफ लगातार छापेमारी कर रही है। प्रशासन ने स्थानीय बिट गार्ड और पटवारियों को भी इस अभियान में शामिल कर दिया है, जिससे इस पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सके।

हालांकि, इस कार्रवाई की गंभीरता को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। क्या यह केवल दिखावटी कदम है, या वास्तव में तस्करों के पूरे गिरोह को खत्म किया जाएगा? प्रशासन की यह कार्रवाई कितनी प्रभावी होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

मीडिया के दबाव में टूटी प्रशासन की नींद

गौरतलब है कि यह पूरा मामला लंबे समय से प्रशासन के संज्ञान में था, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही थी। लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन को मजबूरन हरकत में आना पड़ा और कार्रवाई शुरू करनी पड़ी।

इससे यह स्पष्ट होता है कि यदि मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभाए और प्रशासन को जवाबदेह बनाए, तो बड़े अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

अब आगे क्या?

प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह कार्रवाई केवल एक दिन की खानापूर्ति न हो, बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

जब्त की गई लकड़ी की सही मात्रा का खुलासा किया जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

प्रशासन को स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि तस्करों को किसी भी तरह का समर्थन न मिले।

अभी के लिए, सूरजपुर जिले में यूकेलिप्टस की तस्करी पर की गई इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है, लेकिन असली परीक्षा प्रशासन की आगे की रणनीति और कार्रवाई पर निर्भर करेगी।