
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की उलटी गिनती: बीजापुर में 19 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, सरकार की नीति ला रही बड़ा बदलाव
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की उलटी गिनती: बीजापुर में 19 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, सरकार की नीति ला रही बड़ा बदलाव
छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण की बयार: बीजापुर में 19 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, सरकार की नीति ला रही रंग
छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 का असर दिखने लगा है। बस्तर संभाग में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में बीजापुर जिले में 28 लाख के इनामी 9 नक्सलियों सहित कुल 19 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में एक और सफलता हासिल हुई है। बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों के समक्ष 19 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें से 9 नक्सलियों पर कुल 28 लाख रुपये का इनाम था। नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस आत्मसमर्पण को सरकार की प्रभावी नीतियों का परिणाम बताते हुए कहा कि उनकी सरकार बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति से आने वाले समय में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 लागू की है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जाता है, जिससे वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।
सरकार की इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, पुनर्वास योजनाएं, शिक्षा, रोजगार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा, उन्हें समाज के अन्य लोगों के साथ घुलने-मिलने और एक नई जिंदगी शुरू करने का अवसर भी मिलता है।
बस्तर संभाग में लगातार आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ रही हैं। बीते कुछ वर्षों में राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों में कई विकास कार्य किए हैं, जिससे आम लोगों का सरकार पर विश्वास बढ़ा है। सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली लंबे समय से नक्सल संगठनों से जुड़े हुए थे। इनमें से कई पर सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमले के आरोप थे। लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की रणनीति से वे मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हुए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। सरकार विकास कार्यों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। बीते वर्षों में बस्तर में कई नक्सली हमलों को सुरक्षा बलों ने नाकाम किया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
राज्य सरकार की रणनीति के चलते नक्सली संगठन लगातार कमजोर हो रहे हैं। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के ठिकानों पर दबाव बढ़ा दिया है और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा कैंपों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इससे नक्सलियों की गतिविधियां सीमित हो गई हैं।
इसके अलावा, सरकार ने ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत सड़क निर्माण कार्यों को भी तेज कर दिया है। सुदूर इलाकों में सड़कें बनने से नक्सल प्रभावित गांवों में सरकारी योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। इससे ग्रामीणों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है और वे नक्सल संगठनों से दूरी बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का संकल्प बस्तर को नक्सल मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित इलाकों में बदलाव लाने के लिए सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दे रही है।
सरकार की रणनीति के चलते अब अधिक से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सरकार उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पण के लिए सुरक्षा बलों को भी बधाई दी और कहा कि उनकी मेहनत से ही यह सफलता संभव हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा बलों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है ताकि वे नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
बीजापुर में 19 नक्सलियों का आत्मसमर्पण राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 की सफलता को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि छत्तीसगढ़ सरकार की रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
सरकार की विकास योजनाओं और सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई के चलते नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं और नक्सली आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को दिए जा रहे पुनर्वास पैकेज से यह संकेत मिलता है कि राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।











