वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की श्रद्धांजलि

वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का नमन

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रायपुर, 20 मार्च 2025: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की पुण्यतिथि (20 मार्च) पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी अवंती बाई लोधी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में साहस, स्वाभिमान और बलिदान की प्रतीक रही हैं। उनका नाम अमर वीरांगनाओं में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उन्होंने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 में रानी अवंती बाई लोधी ने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का डटकर विरोध किया और अपने राज्य व मातृभूमि की रक्षा के लिए अंतिम क्षण तक संघर्ष किया।

रानी अवंती बाई लोधी का जीवन परिचयरानी अवंती बाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के मनकेड़ी गाँव में हुआ था। उनका विवाह रामगढ़ के राजा विक्रमादित्य लोधी से हुआ था। दुर्भाग्यवश, राजा विक्रमादित्य लोधी की असमय मृत्यु के बाद, अंग्रेजों ने उनके राज्य पर कब्जा करने की योजना बनाई। रानी अवंती बाई लोधी ने इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका और अपनी प्रजा के सहयोग से अंग्रेजों के विरुद्ध संग्राम का नेतृत्व किया।

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, जब पूरे भारत में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की ज्वाला धधक रही थी, तब रानी अवंती बाई लोधी ने भी अंग्रेजों को अपने राज्य से खदेड़ने के लिए विद्रोह किया। उन्होंने अपनी सेना संगठित की और अनेक मोर्चों पर ब्रिटिश सेना को चुनौती दी। जब अंग्रेजी सेना ने रामगढ़ किले पर हमला किया, तब रानी अवंती बाई ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया।

अंतिम बलिदानरानी अवंती बाई लोधी ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया। जब उन्होंने देखा कि अंग्रेजों की विशाल सेना उनके किले को चारों ओर से घेर चुकी है और बचने का कोई मार्ग नहीं है, तो उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय आत्मबलिदान का मार्ग चुना। 20 मार्च 1858 को उन्होंने अपने ही तलवार से वीरगति को प्राप्त कर लिया, लेकिन उनके बलिदान की गूंज इतिहास में अमर हो गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की श्रद्धांजलिमुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रानी अवंती बाई लोधी नारी शक्ति और सामाजिक चेतना का प्रतीक थीं। उन्होंने समाज को जागरूक करने का कार्य किया और न केवल महिलाओं बल्कि पूरे राष्ट्र को संघर्ष की राह दिखाई। उनकी वीरता, बलिदान और नेतृत्व क्षमता भारत के इतिहास में नारी सशक्तिकरण का अमिट उदाहरण हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का इतिहास वीरांगनाओं की शौर्य गाथाओं से भरा हुआ है। रानी अवंती बाई लोधी जैसी महान नारियों की कहानियाँ हमें आज भी राष्ट्रभक्ति, त्याग और साहस की प्रेरणा देती हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि आत्मसम्मान और मातृभूमि की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटना चाहिए।

रानी अवंती बाई लोधी का योगदान और उनकी प्रेरणारानी अवंती बाई लोधी ने महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बनाया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि नारी शक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकारों और देश की रक्षा के लिए संघर्ष कर सकती है। उनका जीवन आदर्शों, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की मिसाल है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे रानी अवंती बाई लोधी के आदर्शों से प्रेरणा लें और उनके बलिदान को स्मरण कर देश और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि रानी अवंती बाई का जीवन न केवल महिलाओं बल्कि सभी भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत है।

समाज में जागरूकता का आह्वानरानी अवंती बाई लोधी के बलिदान को याद रखते हुए सरकार और समाज को यह प्रयास करना चाहिए कि नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और बलिदान के बारे में जानकारी दी जाए। उनके बलिदान से हम यह सीख सकते हैं कि अपने अधिकारों और मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष करना कितना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार रानी अवंती बाई लोधी के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में विभिन्न योजनाएँ चला रही है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने में मदद मिलेगी।

रानी अवंती बाई लोधी की विरासतरानी अवंती बाई लोधी की स्मृति में विभिन्न राज्यों में उनकी मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। उनके नाम पर कई संस्थाएँ, स्कूल, कॉलेज और योजनाएँ भी चलाई जा रही हैं, जिससे नई पीढ़ी उनके जीवन और बलिदान से प्रेरणा ले सके।

समापनरानी अवंती बाई लोधी का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय है। उनके अदम्य साहस, बलिदान और मातृभूमि के प्रति प्रेम ने उन्हें अमर कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए समाज को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हम सबको उनकी शौर्य गाथा से सीख लेनी चाहिए और देश व समाज की उन्नति में अपना योगदान देना चाहिए।