Chhath Puja Origin: कब और कैसे शुरू हुआ छठ महापर्व? जानें सीता माता और छठी मइया से जुड़ी पौराणिक कथा

Chhath Puja Origin: कब और कैसे शुरू हुआ लोक आस्था का महापर्व? त्रेतायुग से जुड़ी है छठ व्रत की नींव

अयोध्या/पटना: लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कल 25 अक्टूबर को ‘नहाय-खाय’ से शुरू हो रहा है। छठ पूजा सिर्फ एक व्रत नहीं है, बल्कि भगवान सूर्य की उपासना का वह उत्सव है जिसने मानव और प्रकृति के बीच के संबंध को सबसे खूबसूरती से जोड़ा है। इस पर्व की जड़ें त्रेतायुग तक जाती हैं, जब स्वयं भगवान राम और माता सीता ने इसकी परंपरा की नींव रखी थी।

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छठ पूजा की उत्पत्ति को लेकर सबसे प्रचलित कथा भगवान राम और माता सीता से जुड़ी है:

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  • राम-राज्य की शुरुआत: राम-राज्य की स्थापना के बाद, भगवान राम और माता सीता अयोध्या लौटे थे।
  • सीता माता का व्रत: राज्याभिषेक के छठे दिन, सीता माता ने सूर्यदेव की आराधना कर व्रत रखा। उन्होंने उषा यानी सूर्य की किरणों की देवी से प्रार्थना की कि उनके परिवार और समस्त प्रजा पर सदैव प्रकाश और समृद्धि बनी रहे।
  • षष्ठी से छठ: उसी दिन से इस षष्ठी तिथि को ‘छठ’ कहा गया और इसे सूर्य उपासना का सबसे पवित्र पर्व माना गया।

एक अन्य किंवदंती के अनुसार, करुणा की देवी उषा, जिन्हें छठी मइया कहा जाता है, को पूजा जाता है। यह माना जाता है कि छठी मइया बालक के जीवन की रक्षा करती हैं और मातृत्व का वरदान देती हैं।

  • बिहार और पूर्वांचल में जब महिलाएं नदी किनारे डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं, तो वह केवल सूर्य नहीं, बल्कि उषा और प्रकृति के उस सजीव रूप की पूजा करती हैं, जिसने जीवन को गति दी है।

छठ का यह व्रत दर्शाता है कि संयम, शुद्धता और प्रकृति के प्रति समर्पण से मनुष्य ईश्वरीय ऊर्जा को अनुभव कर सकता है। यही कारण है कि बिना किसी मूर्ति या मंदिर के, केवल जल, प्रकाश और दृढ़ संकल्प के साथ यह 36 घंटे का कठिन व्रत पूरा होता है।

इस वर्ष छठ पर्व 25 अक्टूबर को ‘नहाय-खाय’ से शुरू होगा और 28 अक्टूबर की सुबह ‘उषा अर्घ्य’ के साथ व्रत का पारण किया जाएगा।