छत्तीसगढ़ताजा ख़बरेंब्रेकिंग न्यूज़राजनीतिराज्यरायपुर

विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई!

विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई!

WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.27.06 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 8.56.40 PM (1)
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.09.46 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.06.54 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.17.22 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.12.09 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.19.42 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.04.25 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.31.09 PM
WhatsApp-Image-2026-01-04-at-3.52.07-PM-1-207x300 (1)
53037c58-1c56-477e-9d46-e1b17e179e86
bae560a9-5b2a-4ad3-b51f-74b327652841 (1)
c68b7421-3b19-4167-8908-848fa38ba936 (1)

रायपुर, 22 मार्च 2025 – छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार, कवि और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल को प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने की घोषणा के बाद प्रदेशभर में हर्ष और गर्व की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें इस गौरवशाली उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य संवेदनाओं, विचारों और समाज की वास्तविकता का अद्भुत मेल है। उनकी रचनाएँ न केवल छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू से सराबोर हैं, बल्कि वे वैश्विक साहित्यिक परिदृश्य में भी अपनी अनूठी पहचान बनाती हैं। उनकी लेखनी आमजन की भावनाओं को सजीव करती है और पाठकों को एक नए दृष्टिकोण से सोचने पर मजबूर करती है।

विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के उन दुर्लभ लेखकों में शामिल हैं, जिन्होंने कविता और गद्य दोनों विधाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके लेखन में गहरी संवेदना, मौलिकता और सहज अभिव्यक्ति की शक्ति है, जो पाठकों के हृदय में एक स्थायी छाप छोड़ती है। उनकी रचनाएँ सामाजिक यथार्थ को एक अलग परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करती हैं, जिससे साहित्य प्रेमियों और समीक्षकों को एक नई सोच मिलती है।

उनका लेखन छत्तीसगढ़ की परंपराओं, भाषा, संस्कृति और लोकजीवन को व्यापक फलक पर प्रस्तुत करता है। वे अपनी सादगीपूर्ण शैली और गहरे विचारों से हिंदी साहित्य में एक नया आयाम जोड़ते हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘नौकर की कमीज’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘अतिथि शब्द का स्वागत’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जो किसी भी भारतीय भाषा के उत्कृष्ट साहित्यकार को उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार प्राप्त करना किसी भी लेखक के लिए एक बड़ी उपलब्धि होती है, क्योंकि यह साहित्यिक क्षेत्र में उनकी असाधारण क्षमता, विचारों की गहराई और समाज पर उनके प्रभाव को मान्यता प्रदान करता है।

विनोद कुमार शुक्ल को यह सम्मान उनकी विशिष्ट लेखनी, भाषा की मौलिकता, और मानवीय संवेदनाओं को अद्वितीय तरीके से प्रस्तुत करने के लिए प्रदान किया गया है। उनकी कृतियाँ पाठकों को गहराई से प्रभावित करती हैं और साहित्य के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा, “विनोद कुमार शुक्ल की लेखनी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को नए आयाम प्रदान करती है। ज्ञानपीठ पुरस्कार के रूप में उन्हें मिला यह सम्मान न केवल उनकी प्रतिभा की पहचान है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उनकी कृतियाँ समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं और पाठकों को एक नए दृष्टिकोण से सोचने को प्रेरित करती हैं।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों और नवोदित लेखकों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बनेगा। उन्होंने विनोद कुमार शुक्ल के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि उनकी लेखनी से आने वाली पीढ़ियाँ भी मार्गदर्शन प्राप्त करती रहेंगी।

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा के बाद साहित्य जगत में उत्सव का माहौल है। देश के प्रमुख साहित्यकारों, कवियों और आलोचकों ने विनोद कुमार शुक्ल को बधाई दी और उनकी लेखनी की विशेषताओं को रेखांकित किया। हिंदी साहित्य के वरिष्ठ लेखक और आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा, “विनोद कुमार शुक्ल की भाषा की मौलिकता और उनकी कल्पनाशीलता अद्वितीय है। वे अपने सरल लेकिन प्रभावशाली लेखन से पाठकों के मन पर अमिट छाप छोड़ते हैं। यह पुरस्कार उनके सृजनशील योगदान की सच्ची मान्यता है।”

इसी तरह, वरिष्ठ कवि और साहित्यकार मंगलेश डबराल ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएँ विचारों की गहराई और समाज के सूक्ष्म पहलुओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा, “विनोद जी की कहानियाँ और कविताएँ हमें अपने भीतर झाँकने और समाज को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देती हैं।”

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ में साहित्य प्रेमियों के बीच हर्ष की लहर दौड़ गई है। विभिन्न साहित्यिक संगठनों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों ने इस अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करने की घोषणा की है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और अन्य शहरों में साहित्यकारों ने एकत्र होकर विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य पर चर्चा की और उन्हें बधाई दी।

राज्य के प्रमुख साहित्यिक संस्थान, जैसे छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी और हिंदी ग्रंथ अकादमी, ने भी उनके सम्मान में विशेष गोष्ठियों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन कार्यक्रमों में उनकी प्रमुख रचनाओं पर परिचर्चा होगी और उनकी साहित्यिक यात्रा को रेखांकित किया जाएगा।

विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य सामाजिक और मानवीय सरोकारों से जुड़ा हुआ है। उनकी रचनाएँ हमें एक ऐसी दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ कल्पनाशीलता और यथार्थ का अद्भुत संगम होता है। उनकी कहानियों और उपन्यासों में पात्रों की सरलता और गहराई पाठकों को बांधकर रखती है।

उनकी कविता संग्रहों और उपन्यासों में प्रकृति, मानवीय संबंधों, समाज की विसंगतियों और साधारण मनुष्यों के संघर्षों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। उनकी भाषा शैली सहज, प्रवाहमयी और प्रभावशाली है, जो पाठकों के मन पर अमिट छाप छोड़ती है।

विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों में आम जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को गहराई से प्रस्तुत किया गया है। उनका उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ भारतीय साहित्य में मील का पत्थर माना जाता है, जिसमें आम आदमी के संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों का अत्यंत सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है। उनकी अन्य कृतियाँ भी समान रूप से प्रभावशाली हैं और साहित्य जगत में उन्हें विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं।

ज्ञानपीठ पुरस्कार का सम्मान विनोद कुमार शुक्ल के साहित्यिक योगदान की सच्ची मान्यता है। उनका लेखन छत्तीसगढ़ की माटी से जन्मा है, लेकिन उसकी गूँज पूरे भारतीय साहित्य जगत में सुनाई देती है। यह पुरस्कार न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी और साहित्य प्रेमियों को नए दृष्टिकोण से सोचने के लिए प्रेरित करती रहेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बधाई और साहित्य जगत की शुभकामनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि विनोद कुमार शुक्ल का लेखन युगों-युगों तक हिंदी साहित्य को समृद्ध करता रहेगा।

Ashish Sinha

e6e82d19-dc48-4c76-bed1-b869be56b2ea (2)
WhatsApp Image 2026-01-04 at 4.02.37 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.36.04 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.39.12 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.44.45 PM (1)

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!