चुनावी तैयारियों को मजबूत करने चुनाव आयोग की पहल: ईआरओ, डीईओ और सीईओ स्तर पर राजनीतिक दलों संग बैठकें जारी

चुनावी तैयारियों को मजबूत करने चुनाव आयोग की पहल: ईआरओ, डीईओ और सीईओ स्तर पर राजनीतिक दलों संग बैठकें जारी

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रायपुर, 22 मार्च 2025: भारत में आगामी चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर राजनीतिक दलों के साथ संवाद स्थापित किया जा रहा है। इसके तहत देशभर में 4,123 निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों (एसी) में मतदान केंद्र स्तर पर लंबित मुद्दों के समाधान हेतु सर्वदलीय बैठकें आयोजित कर रहे हैं। साथ ही, सभी 28 राज्यों और 8 संघ राज्य क्षेत्रों के 788 जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और 36 मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) भी जिला और राज्य स्तर पर ऐसी बैठकें कर रहे हैं। यह बैठकों का आयोजन 31 मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राजनीतिक दल और उनके अधिकृत प्रतिनिधि जैसे बूथ लेवल एजेंट (बीएलए), पोलिंग एजेंट, काउंटिंग एजेंट और चुनाव एजेंट चुनाव प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन बैठकों में उनकी भागीदारी से चुनाव संबंधी लंबित मुद्दों का प्रभावी समाधान निकालने में मदद मिल रही है। निर्वाचन आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इन बैठकों में सक्रिय भाग लें और चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में सहयोग करें।

यह पहल 4 मार्च 2025 को आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधु तथा विवेक जोशी की उपस्थिति में दिए गए निर्देशों के अनुरूप है। इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960, तथा निर्वाचन संचालन नियम 1961 के तहत कानूनी ढांचे के भीतर रहकर चुनावी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की व्यवस्था की गई है। आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए मैनुअल, दिशानिर्देश और अनुदेश इन बैठकों का आधार हैं।

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इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार करना और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना है। कुछ प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:

मतदाता सूची में सुधार: वोटर लिस्ट में किसी भी प्रकार की विसंगति को दूर करना।

मतदान केंद्रों की समीक्षा: मतदान केंद्रों की स्थिति और आवश्यक संसाधनों का मूल्यांकन।

चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता: राजनीतिक दलों के सुझावों को शामिल कर प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाना।

आचार संहिता का पालन: राजनीतिक दलों को चुनाव संहिता की जानकारी देना और पालन सुनिश्चित करना।

चुनाव संबंधी शिकायतों का समाधान: मतदान से पहले उठने वाले किसी भी मुद्दे पर समय रहते कार्रवाई करना।

चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सोशल मीडिया, समाचार पत्र, टीवी और रेडियो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा, निर्वाचन आयोग अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (https://x.com/ECISVEEP?ref_src=twsrc%5Egoogle%7Ctwcamp%5Eserp%7Ctwgr%5Eauthor) पर बैठकों से संबंधित अपडेट साझा कर रहा है।

बैठकों में भाग ले रहे विभिन्न राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इस प्रक्रिया से चुनावी निष्पक्षता को बढ़ावा मिलेगा और संभावित विवादों को पहले ही सुलझाने का अवसर मिलेगा। कुछ राजनीतिक दलों ने सुझाव दिया कि भविष्य में इन बैठकों को और अधिक विस्तृत किया जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया में और सुधार लाया जा सके।

निर्वाचन आयोग द्वारा की जा रही यह पहल लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चुनावों को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से संपन्न कराने के लिए इन बैठकों का महत्व काफी बढ़ जाता है। आने वाले दिनों में आयोग की यह प्रक्रिया और अधिक प्रभावी रूप से लागू की जाएगी, जिससे निष्पक्ष एवं सुचारू चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।