ताजा ख़बरेंब्रेकिंग न्यूज़राजनीतिराज्य

कर्नाटक विवाद: आरक्षण नीति पर राजनीति और डॉ. अंबेडकर के अपमान के आरोप

कर्नाटक विवाद: आरक्षण नीति पर राजनीति और डॉ. अंबेडकर के अपमान के आरोप

WhatsApp Image 2025-10-31 at 2.58.20 PM (1)
WhatsApp-Image-2025-10-31-at-2.41.35-PM-300x300

नई दिल्ली: कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि कर्नाटक सरकार की आरक्षण नीति को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और इसके पीछे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सोची-समझी रणनीति है। रमेश ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार विधानसभा में उपस्थित नहीं थे और उन्होंने कोई विवादित बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे भ्रम फैलाया जा सके।

कर्नाटक में अल्पसंख्यक समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण देने की नीति सितंबर 1994 में लागू की गई थी। इस नीति को कई सरकारों ने आगे बढ़ाया, जिनमें कांग्रेस, जनता दल (सेक्युलर) और बीजेपी के मुख्यमंत्री भी शामिल थे। लेकिन इस मुद्दे को लेकर बीजेपी ने अचानक तीखी आलोचना शुरू कर दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते बीजेपी को इस मुद्दे को तूल देने का अवसर मिला है। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत और सरकार द्वारा अपने चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में उठाए गए कदमों से बीजेपी दबाव में है।

जयराम रमेश ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कई आरोप लगाए। उन्होंने सवाल किया कि 1949 में डॉ. भीमराव अंबेडकर का किसने अपमान किया, जब उनके संविधान को “मनुवादी” संविधान नहीं माना गया था? उन्होंने कहा कि अंबेडकर की मूर्ति, जो पहले संसद भवन के सामने थी, उसे हटाकर एक कोने में क्यों लगाया गया?

इतना ही नहीं, रमेश ने गृहमंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाया कि 17 दिसंबर 2024 को उन्होंने डॉ. अंबेडकर का अपमान किया था। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने धर्म के आधार पर नागरिकता देने का कानून लाकर संविधान की मूल भावना को चोट पहुंचाई है।

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

रमेश ने यह भी दावा किया कि 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में डॉ. अंबेडकर ने स्वयं कहा था कि संविधान के निर्माण का श्रेय कांग्रेस को जाता है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस नहीं होती तो संविधान भी नहीं बनता। उनका यह बयान बीजेपी के उस दावे का सीधा जवाब था, जिसमें वह खुद को संविधान का असली रक्षक बताती रही है।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने जब से सत्ता संभाली है, वह अपने वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। राज्य में निवेश आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं और आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। रमेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी के पास सरकार की इन उपलब्धियों का जवाब नहीं है, इसलिए वह नए-नए मुद्दे उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि संसद के भीतर एक गंभीर मुद्दे पर बहस की योजना थी, लेकिन अचानक से कर्नाटक का मुद्दा उठा लिया गया, जिससे वास्तविक चर्चा को टाल दिया जाए। उन्होंने इसे “ध्यान भटकाने की राजनीति” करार दिया।

बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि कांग्रेस केवल खुद को बचाने के लिए झूठा प्रचार कर रही है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि कर्नाटक की सरकार अल्पसंख्यकों को विशेष लाभ देकर तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। बीजेपी का कहना है कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है और इससे समाज में विभाजन पैदा होगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद के पीछे 2024 के लोकसभा चुनावों की रणनीति भी हो सकती है। कांग्रेस कर्नाटक मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर सकती है, जबकि बीजेपी इस पर हमला करके अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास करेगी।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर दोनों दल किस तरह अपनी रणनीति आगे बढ़ाते हैं और जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

Ashish Sinha

e6e82d19-dc48-4c76-bed1-b869be56b2ea (2)
WhatsApp Image 2025-08-15 at 11.16.07 AM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 11.19.38 AM
WhatsApp Image 2025-08-06 at 11.20.46 PM
WhatsApp Image 2025-08-15 at 11.25.37 AM

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!