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अंबिकापुर नगर निगम की एमआईसी बैठक संपन्न: क्या वाकई बदलाव की शुरुआत या सिर्फ औपचारिकता?

अंबिकापुर नगर निगम की एमआईसी बैठक संपन्न: क्या वाकई बदलाव की शुरुआत या सिर्फ औपचारिकता?

पारदर्शिता बनाम राजनीतिक प्रभाव – क्या वाकई विकास होगा?

अंबिकापुर। नगर निगम अंबिकापुर की मेयर-इन-कौंसिल (एमआईसी) बैठक 24 मार्च 2025 को संपन्न हो गई। यह पहली बार था जब नगर निगम की बैठक की शुरुआत राष्ट्रगान से की गई। अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने मेयर इन काउंसिल (MIC) में 10 पार्षदों को शामिल किया:

विभागवार पार्षदों की सूची जो उपस्थित रहे। :

शिक्षा विभाग: सुशांत कुमार घोष

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग: विपिन कुमार पांडे

आवास, पर्यावरण एवं लोक निर्माण विभाग: मनीष सिंह

जल कार्य विभाग: जितेंद्र सोनी (अज्जु)

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग: ममता तिवारी

बाजार विभाग: अनिता रविंद्र गुप्त ‘भारती’

महिला तथा बाल कल्याण विभाग: प्रियंका गुप्ता

पुनर्वास तथा नियोजन विभाग: रविकात उरांव

राजस्व विभाग: श्वेता गुप्ता

विधि तथा सामान्य प्रशासन विभाग: विशाल गोस्वामी (दूधनाथ)

इस बैठक में नगर निगम आयुक्त, विभिन्न विभागों के अधिकारी और पत्रकार साथी उपस्थित रहे। इस दौरान 21 अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई और कई को स्वीकृति दी गई। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ये फैसले सिर्फ कागजों पर रह जाएंगे, या फिर शहर को वाकई विकास की नई राह मिलेगी?

1. विकास कार्यों की हरी झंडी, लेकिन पिछली योजनाओं का क्या हुआ?

बैठक में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत कई नए प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। सड़कों का डामरीकरण, पुल-पुलियों का निर्माण, सीसी रोड और नालियों की मरम्मत जैसे कार्यों पर सहमति बनी।

गणपति धाम प्रवेश द्वार निर्माण के स्थल परिवर्तन को भी मंजूरी दी गई। लेकिन इससे पहले भी कई परियोजनाओं का स्थल बदला गया था, जिनमें से कई अधूरी पड़ी हैं। क्या इस बार कार्य समय पर पूरा होगा, या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

2. सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े दावे, लेकिन सड़कों की हकीकत?

बैठक में 100 अतिरिक्त सफाई कर्मियों की भर्ती और दो नई स्वीपिंग मशीनों की खरीद का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही, मच्छर नियंत्रण के लिए 200 लीटर डेल्टामेथ्रिन और 600 लीटर टेमीफास खरीदने का निर्णय लिया गया।

लेकिन सवाल यह है कि क्या इन नए संसाधनों का सही इस्तेमाल होगा? शहर के कई इलाकों में पहले से मौजूद सफाई कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है, और जहां सफाई होती भी है, वहां नियमित निगरानी की कमी है। अगर नए कर्मचारी और मशीनें भी कागजों तक सीमित रहे, तो इस बैठक का क्या औचित्य?

3. पेंशन योजनाओं पर चर्चा, लेकिन कब तक पहुंचेगा लाभ?

बैठक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन, सुखद सहारा पेंशन, मुख्यमंत्री विधवा पेंशन और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन के नए आवेदनों को स्वीकृति दी गई।

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लेकिन वास्तविकता यह है कि कई पेंशनधारकों को समय पर पैसा नहीं मिलता। अधिकारी फाइलों की जांच-पड़ताल में महीनों निकाल देते हैं। क्या इस बार कोई ठोस तंत्र बनेगा, जिससे जरूरतमंदों को समय पर लाभ मिल सके?

4. निगम संपत्तियों का व्यावसायिक इस्तेमाल – किसके फायदे के लिए?

बैठक में गांधी स्टेडियम और प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित निगम की खाली दुकानों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया। इससे निगम को राजस्व मिलेगा, लेकिन सवाल यह है कि यह संपत्तियां किन लोगों को मिलेंगी?

क्या पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी, या फिर यह भी कुछ खास लोगों को सस्ते दामों पर देने का खेल होगा? निगम ने इससे पहले भी कई संपत्तियां लीज पर दी थीं, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय कई जगहें वीरान पड़ी हैं।

5. ट्रैफिक और स्ट्रीट लाइट की समस्या हल होगी या नहीं?

बैठक में ऑटोमेटिक ट्रैफिक सिग्नल लगाने और 10,359 स्ट्रीट लाइटों के संधारण का प्रस्ताव पारित किया गया।

लेकिन इससे पहले भी कई ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे, जो कुछ महीनों में बंद पड़ गए। स्ट्रीट लाइटों की देखरेख का जिम्मा निजी कंपनियों को दिया जाता है, लेकिन कई इलाकों में अंधेरा पसरा रहता है। क्या इस बार इस समस्या का स्थायी समाधान होगा?

6. बजट का खेल – नई योजनाओं के लिए पैसा, लेकिन पुराने प्रोजेक्ट अधूरे?

वित्तीय वर्ष 2024-25 का पुनरीक्षित बजट और 2025-26 का प्रस्तावित बजट बैठक में पेश किया गया। 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत राशि से कई योजनाओं पर मुहर लगी।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बजट सही से खर्च होगा? कई बार बजट तो पारित हो जाता है, लेकिन काम धीमी गति से चलता है या अधूरा रह जाता है। अगर इस बार भी यही हुआ, तो इन योजनाओं का लाभ जनता तक कब पहुंचेगा?

क्या वाकई शहर बदलेगा या यह बैठक भी सिर्फ औपचारिकता थी?

नगर निगम की इस बैठक में कई अच्छे फैसले लिए गए, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी – इन फैसलों को अमल में लाने की।

✔ क्या सफाई व्यवस्था में सचमुच सुधार होगा?✔ क्या सड़कें और नालियां तय समय पर बनेंगी?✔ क्या पेंशन योजनाओं का पैसा जरूरतमंदों को समय पर मिलेगा?✔ क्या निगम की संपत्तियों का आवंटन पारदर्शिता से होगा?✔ क्या ट्रैफिक व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट की समस्याएं हल होंगी?

अगर इन सवालों का जवाब ‘हां’ में आता है, तो यह बैठक शहर के लिए फायदेमंद साबित होगी। लेकिन अगर यह भी सिर्फ कागजों में सिमट गई, तो अंबिकापुर के लोग अगली बैठक में फिर इन्हीं मुद्दों को दोहराते देखेंगे।


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