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कांग्रेस की मांग: आरक्षण संशोधन विधेयक पर राज्यपाल तत्काल करें हस्ताक्षर – दीपक बैज

आरक्षण संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का हमला: राजभवन से शीघ्र हस्ताक्षर की मांग

रायपुर, 10 अप्रैल 2025। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर कांग्रेस ने राज्यपाल और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने गुरुवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से राज्य के सर्व समाज में नई उम्मीद जगी है और अब समय आ गया है कि राजभवन इस विधेयक पर तत्काल निर्णय ले।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जगी उम्मीद

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले दो वर्षों से अधिक समय से 76 प्रतिशत आरक्षण वाला विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति की प्रतीक्षा में है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति भारतीय जनता पार्टी की “बदनीयती और षड्यंत्र” का नतीजा है, जिसने छत्तीसगढ़ के बहुसंख्यक आबादी को शिक्षा और रोजगार के मौलिक अधिकारों से वंचित कर रखा है।

“सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सर्व समाज को नया विश्वास मिला है कि अब उनका अधिकार उन्हें मिलेगा, जो भाजपा के षड्यंत्र के चलते रोक दिया गया था।” — दीपक बैज, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष


विधेयक में आरक्षण का प्रस्तावित वितरण

2022 में विधानसभा से पारित नवीन आरक्षण विधेयक में आरक्षण का प्रस्तावित स्वरूप इस प्रकार था:

  • अनुसूचित जनजाति (ST): 20% से बढ़ाकर 32%

  • अनुसूचित जाति (SC): आबादी के अनुरूप 13%

  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 14% से बढ़ाकर 27%

  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 4%

यह विधेयक सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था, लेकिन अब तक यह राजभवन में स्वीकृति के लिए लंबित है।

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भाजपा पर सियासी प्रहार

दीपक बैज ने भाजपा से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर मार्ग प्रशस्त कर दिया है, तब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को यह बताना चाहिए कि वे महामहिम राज्यपाल से विधेयक पर हस्ताक्षर करवाने की अपील कब करेंगे।

“सामाजिक न्याय की दिशा में यह विधेयक बेहद अहम है। भाजपा सरकार और राजभवन को अब हठधर्मिता छोड़नी चाहिए।”


सवालों के घेरे में भाजपा का रुख

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और उसके नेताओं की वजह से आम छत्तीसगढ़िया, विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
दीपक बैज ने कहा कि अब समय है कि भाजपा अपना रुख साफ करे और प्रदेश की जनता को जवाब दे।


राजनीतिक संदेश और रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगामी लोकसभा चुनावों में प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। सामाजिक न्याय और आरक्षण की बहस छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनावी हवा को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।


कांग्रेस की मांगें

  1. राज्यपाल तत्काल विधेयक पर हस्ताक्षर करें

  2. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजभवन से अनुशंसा करें

  3. भाजपा स्पष्ट करे कि वह आरक्षण संशोधन विधेयक के पक्ष में है या नहीं

  4. संविधान और सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप निर्णय लिया जाए


कांग्रेस का आधिकारिक बयान

“सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार और राजभवन को देर नहीं करनी चाहिए। यदि राज्यपाल इस विधेयक पर तुरंत हस्ताक्षर नहीं करते, तो यह छत्तीसगढ़ के करोड़ों लोगों के अधिकारों की उपेक्षा होगी।”सुशील आनंद शुक्ला, अध्यक्ष, कांग्रेस संचार विभाग

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