बिहार में वोटर लिस्ट बदलाव: खूब हंगामा, जनता और नेताओं की जबरदस्त भागीदारी

PATNA. बिहार में वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने का काम जोर-शोर से चल रहा है और इस बार इसमें जनता, राजनीतिक दल और उनके बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) की भागीदारी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शुरुआत में नेताओं की सुस्ती दिखी, मगर जनता के बढ़ते उत्साह ने सभी को सक्रिय कर दिया। राज्य चुनाव आयोग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, कुल 1,60,813 दावे और आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही, नए मतदाताओं, खासकर युवाओं की भारी भागीदारी ने लोकतंत्र के प्रति बढ़ती जागरूकता को उजागर किया है।

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राष्ट्रीय दल
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सबसे ज्यादा 53,338 दावे और आपत्तियां दाखिल कीं।
कांग्रेस ने 17,549 और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 74 आवेदन जमा किए।

क्षेत्रीय दल
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 47,506 और जनता दल (यूनाइटेड) (JD(U)) ने 36,550 दावे-आपत्तियां दर्ज कीं।
अन्य छोटे दलों ने भी सैकड़ों आवेदन भेजे।

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आम जनता का जोश:
आम लोगों ने भी इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल 23,557 दावे और 741 अपात्रता के मामले दर्ज किए गए। शुरुआत में भागीदारी कम थी, मगर जागरूकता बढ़ने के बाद यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा।
नए वोटरों का उत्साह
18 साल या उससे ज्यादा उम्र के युवाओं ने इस बार रिकॉर्ड 87,966 Form 6 + Declaration जमा किए, जिनमें से छह फॉर्म BLAs के जरिए आए। यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है और दिखाता है कि बिहार का युवा अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से ले रहा है।
आयोग की गारंटी
100% पारदर्शिताचुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने से पहले इलेक्शन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) या असिस्टेंट इलेक्शन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) पूरी जांच करेंगे। नाम हटाने के लिए पहले नोटिस जारी होगा, सुनवाई होगी और फिर ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ (लिखित फैसला) दिया जाएगा। आयोग ने यह भी सुविधा दी है कि मतदाता अपनी वोटर डिटेल्स ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।
विवाद और सुप्रीम कोर्ट की नजर
कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि खास समुदायों और गरीबों के नाम जानबूझकर सूची से हटाए जा सकते हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी दखल दिया है और चुनाव आयोग को पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया है। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि बिना उचित प्रक्रिया के कोई नाम नहीं हटेगा।