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नन प्रकरण : छत्तीसगढ़ महिला आयोग की कार्यप्रणाली पर बृंदा करात का सवाल, पीड़ित आदिवासी युवतियों ने जताई निराशा

नन प्रकरण : छत्तीसगढ़ महिला आयोग की कार्यप्रणाली पर बृंदा करात का सवाल, पीड़ित आदिवासी युवतियों ने जताई निराशा
(रिपोर्ट : संजय पराते)

नई दिल्ली, 6 सितम्बर 2025। छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 25 जुलाई 2025 को हुई नन-प्रकरण घटना को लेकर अब राज्य महिला आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृंदा करात ने आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि आयोग राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और पीड़ित आदिवासी युवतियों को न्याय देने के बजाय उन्हें अपमानित कर रहा है।

प्रकरण की पृष्ठभूमि

नारायणपुर की तीन आदिवासी लड़कियां नौकरी की तलाश में दो ननों के साथ आगरा जा रही थीं।

दुर्ग स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने रेलवे पुलिस की मौजूदगी में उन पर हमला किया, गालियां दीं और धर्मांतरण के आरोप लगाए।

पुलिस ने बिना जांच ननों और एक आदिवासी युवक को गिरफ्तार कर लिया।

देशभर में इस घटना पर विरोध प्रदर्शन हुए, संसद में भी विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला बताया।

2 अगस्त को एनआईए कोर्ट ने ननों और युवक को जमानत दे दी, क्योंकि कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

महिला आयोग की सुनवाई पर विवाद

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4 सितम्बर को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में हुई सुनवाई के बाद पीड़ित युवतियों ने कहा कि उन्हें आयोग से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। आयोग के सदस्यों ने धर्म परिवर्तन और निजी जीवन से जुड़े सवाल पूछे, जैसे –

“धर्म क्यों बदल रहे हो?”

“गांव से बाहर नौकरी के लिए पुलिस को क्यों नहीं बताया?”

“चर्च के साथ मस्जिद भी क्यों नहीं जाते?”

पीड़ित युवतियों का आरोप है कि आयोग ने उनके साथ हुए यौनिक हमले की गंभीरता को नज़रअंदाज़ किया और उन्हें ही आरोपी की तरह पेश किया।

बृंदा करात का आरोप

बृंदा करात ने पत्र में लिखा है कि—

आयोग वीडियो सबूत होने के बावजूद हमलावरों पर कार्रवाई की दिशा में काम नहीं कर रहा।

आयोग की कार्यवाही से पीड़ितों का अपमान हुआ है।

यह संस्था राजनीतिक दबाव में आरोपियों को बचा रही है।

आयोग का दायित्व है कि वह पीड़ितों का पक्ष ले और त्वरित न्याय सुनिश्चित करे।

मांगे

करात ने मांग की है कि –

हमलावरों पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो।

दोषी पुलिसकर्मियों को दंड मिले।

पीड़ित आदिवासी युवतियों को मुआवजा दिया जाए।

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