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वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर राष्ट्र एकता उत्सव, जम्मू-कश्मीर में विरोध तेज

वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर देशभर में उत्सव, जम्मू-कश्मीर में उठा विवाद

नई दिल्ली/श्रीनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर को वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में “राष्ट्र एकता उत्सव” मनाने का फैसला किया है। इस आयोजन के तहत देशभर में सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

बीजेपी ने इसे ‘राष्ट्र एकता का उत्सव’ बताते हुए कहा है कि वंदे मातरम् भारत की आज़ादी के संघर्ष और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है।
हालांकि, इस बीच जम्मू-कश्मीर से एक अलग तस्वीर सामने आई है। वहां के मुल्की मुस्लिम अधिवक्ता (MMU) संगठन ने इस आदेश का विरोध किया है। MMU का कहना है कि प्रशासन द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में वंदे मातरम् से जुड़े आयोजनों को अनिवार्य करने की कोशिश की जा रही है, जो धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

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MMU ने इस आदेश को वापस लेने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि इसे रद्द नहीं किया गया, तो राज्य के सभी धार्मिक नेता बैठक बुलाकर अगला कदम तय करेंगे। संगठन का कहना है कि “लोगों को ऐसे आयोजनों में शामिल करने के लिए मजबूर करना जो उनके धार्मिक विश्वासों के खिलाफ हैं, पूरी तरह अनुचित है।”

वहीं, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने इस विरोध को “अनुचित और सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास” बताया है। उन्होंने कहा कि, “वंदे मातरम् भारत की एकता और सम्मान का प्रतीक है, इसकी गरिमा सबको स्वीकार करनी चाहिए।”

देशभर में इस समय वंदे मातरम् उत्सव को लेकर व्यापक उत्साह है। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी और निजी संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन आयोजित किए जा रहे हैं।

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