
SIR जांच के बीच विवाद: भारतीय महिला बांग्लादेश भेजी गई, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया
भारत में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन शुरू होते ही अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की सीमा पार वापसी तेज हो गई है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश की जेल में बंद गर्भवती भारतीय महिला को मानवीय आधार पर वापस लाने का आदेश दिया है। जानें पूरा मामला।
भारत में SIR जांच शुरू, अवैध बांग्लादेशी प्रवासी सीमा पार लौटने लगे; सुप्रीम कोर्ट ने गर्भवती भारतीय महिला की वतन वापसी का आदेश दिया
देश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी मतदाता सूची की व्यापक जांच शुरू होते ही अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की हलचल बढ़ गई है। विशेषकर पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में लोग भारत छोड़कर बांग्लादेश लौटते दिखाई दे रहे हैं। यह प्रक्रिया 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तेज हुई है।
जानकारी के अनुसार, SIR जांच के दौरान विभिन्न राज्यों में मतदाताओं की पहचान, दस्तावेज़ों और व्यक्तिगत विवरणों का सत्यापन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कठोर जांच के बाद उन अवैध प्रवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं, जो वर्षों से बिना कागज़ात भारत में रह रहे थे।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई। एक याचिका में दावा किया गया कि सोनाली नाम की एक गर्भवती महिला को बिना उचित वेरिफिकेशन भारत से बांग्लादेश भेज दिया गया। वर्तमान में वह बांग्लादेश की एक जेल में बंद है, जो सीमा से लगभग 40 किलोमीटर दूर है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मानवीय आधार पर सोनाली को भारत लौटने की अनुमति दी जाए। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यदि आवश्यक हो तो महिला को निगरानी में या अस्पताल में रखा जाए, लेकिन उसे भारत वापस लाना अनिवार्य है। कोर्ट ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल को तलब किया और अगली सुनवाई उनके उपस्थित होने के बाद करने का निर्देश दिया।
सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कोर्ट को बताया कि सोनाली भारतीय नागरिक है और उसके परिवार को भी बांग्लादेश में हिरासत में रखा गया है। कोर्ट में मौजूद उनके पिता ने भावुक अपील करते हुए कहा—
“मैं भारतीय हूं, मेरी बेटी भी भारतीय है। उसे जबरन देश से बाहर भेज दिया गया। कृपया उसे मालदा लौटने की अनुमति दी जाए।”











