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अयोध्या रामलला आरती लाइव: 3 दिसंबर का अलौकिक श्रृंगार, भोग, आरती और दर्शन का पूरा समय

अयोध्या धाम में विराजमान श्री रामलला के 3 दिसंबर के अलौकिक श्रृंगार, चार समय भोग, दैनिक आरती, दर्शन समय और मंदिर में तैयार होने वाले विशेष व्यंजनों के बारे में पढ़ें।

अयोध्या: 3 दिसंबर को रामलला का अलौकिक श्रृंगार, चार समय लगता है भोग — जानें दैनिक आरती का पूरा क्रम

अयोध्या धाम में 3 दिसंबर का अलौकिक श्रृंगार

मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, विक्रम संवत 2082 (03 दिसंबर, बुधवार) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम में ब्रह्मांड नायक श्री रामलला सरकार का भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया गया।
हर दिन रामलला का श्रृंगार अलग-अलग रूप में होता है और भक्तों को नए दिव्य स्वरूप के दर्शन मिलते हैं।

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रामलला को चार समय भोग

श्री रामलला को प्रतिदिन चार बार भोग लगाया जाता है।
सभी भोग मंदिर की विशेष रसोई में तैयार किए जाते हैं।

1. बाल भोग (सुबह)

  • सुबह की शुरुआत बाल भोग से होती है।
  • इसमें हल्के और सुपाच्य व्यंजन परोसे जाते हैं।

2. राजभोग (दोपहर 12 बजे)

  • दोपहर 12 बजे भोग आरती होती है।
  • इसमें मौसमी प्रसाद, फल, मिठाइयाँ और विभिन्न पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं।

3. संध्या भोग (7.30 बजे संध्या आरती)

  • साढ़े सात बजे संध्या आरती की जाती है।
  • इसके बाद शाम का भोग अर्पित किया जाता है।

4. शयन भोग (रात्रि 8.30 बजे)

  • रात 8.30 बजे शयन भोग के साथ रामलला को शयन करवाया जाता है।
  • इसके बाद भक्तों के दर्शन बंद हो जाते हैं।

हर मौसम में अलग-अलग वस्त्र

मंदिर प्रशासन के अनुसार रामलला को ऋतु के अनुसार वस्त्र पहनाए जाते हैं—

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  • गर्मी में: सूती और हल्के वस्त्र
  • सर्दी में: स्वेटर, ऊनी वस्त्र और गले के लिए गरम पट्टे
  • उत्सव एवं पर्वों पर विशेष अलंकरण और श्रृंगार तैयार किए जाते हैं।

दैनिक आरती और दर्शन का समय

  • सुबह जगार एवं पहली आरती: 6.30 बजे
  • भोग आरती: 12 बजे
  • संध्या आरती: 7.30 बजे
  • शयन: 8.30 बजे
  • दर्शन का समय: रात 7.30 बजे तक

रामलला को हर सुबह स्नान, लेप, वस्त्र परिधान, गहने और फूलों की सुगंधित माला से सजाया जाता है। माला के फूल दिल्ली से विशेष रूप से मंगाए जाते हैं


Ayodhya Ramlala Aarti Live Darshan — 03 December

अयोध्या में विराजमान संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी प्रभु श्री रामलला का श्रृंगार प्रतिदिन अत्यंत भव्य रूप में होता है।
हर दिन अलग-अलग वस्त्र, आभूषण और पुष्प श्रृंगार भक्तों को अद्भुत अनुभूति कराते हैं!

Ashish Sinha

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