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सांसद बृजमोहन अग्रवाल की लोकसभा में मांग: नॉन-ट्रेसेबल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट हो पूरी तरह ऑटो-डिजिटल

लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल की महत्वपूर्ण मांग: “नॉन-ट्रेसेबल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पूरी तरह ऑटो-डिजिटल हो”

नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में आज रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने लाखों नागरिकों से जुड़े एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। शून्यकाल में उन्होंने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से मांग की कि इंश्योरेंस क्लेम, चोरी के मामलों, तथा अप्राकृतिक मृत्यु की स्थितियों में आवश्यक नॉन-ट्रेसेबल रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जारी करने की पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः ऑटो–डिजिटल, पारदर्शी, और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को देरी, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न से मुक्ति मिल सके।


“CCTNS से जोड़ें सभी सेवाएँ”— बृजमोहन अग्रवाल का सुझाव

सांसद अग्रवाल ने गृह मंत्रालय को एक व्यवहारिक व टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान देते हुए कहा कि—

  • पुलिस द्वारा जारी सभी रिपोर्टें CCTNS (Crime & Criminal Tracking Network & Systems) से सीधे लिंक हों।
  • रिपोर्टें ऑटो-डिलीवरी के माध्यम से पीड़ितों के मोबाइल फोन पर स्वतः उपलब्ध कराई जाएं।
  • संपूर्ण प्रक्रिया ट्रैक करने योग्य, समय-सीमा आधारित और 100% पारदर्शी हो।

उन्होंने कहा कि यह कदम सामान्य नागरिक के जीवन को बेहद आसान बनाएगा और पुलिस व्यवस्था के प्रति विश्वास भी बढ़ाएगा।

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“यह केवल राज्य नहीं, राष्ट्रीय स्तर की समस्या”

सांसद बृजमोहन ने सदन को बताया कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में एक प्रणालीगत खामी मौजूद है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि—

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को रिश्वतखोरी के मामलों पर स्वतः संज्ञान लेना पड़ा था।
  • कर्नाटक सरकार के चीफ सेक्रेट्री और डीजीपी तक को नोटिस जारी करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि ये घटनाएं संकेत देती हैं कि तकनीक आधारित सुधार अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता हैं।


“शोकाकुल परिवार को दफ्तरों के चक्कर लगवाना अमानवीय”

सांसद अग्रवाल ने अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में कहा कि जब किसी परिवार में अप्राकृतिक मृत्यु होती है, वह पहले से ही सदमे में होता है। ऐसे समय में—

  • रिपोर्टों के लिए चक्कर लगवाना
  • फाइलों के बीच भटकाना
    अमानवीय और अन्यायपूर्ण है।

इसी तरह चोरी के मामलों में नॉन-ट्रेसेबल सर्टिफिकेट के लिए लोग

  • लंबी
  • थकाऊ
  • और कई बार भ्रष्टाचारग्रस्त
    प्रक्रिया से गुजरते हैं, जिससे इंश्योरेंस क्लेम महीनों तक लटके रहते हैं।

“100% डिजिटल प्रक्रिया शोषण खत्म कर देगी”

सांसद ने स्पष्ट कहा कि—

“यदि इन प्रक्रियाओं को पूर्णत: डिजिटल कर दिया जाए, तो मानवीय हस्तक्षेप समाप्त होगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश स्वतः खत्म हो जाएगी।”

उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की।


 

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