बस्तर ओलंपिक 2025 समापन: बाईचुंग भूटिया की मौजूदगी से बढ़ा जोश, मलखम्भ ने मोहा मन

बाईचुंग भूटिया की उपस्थिति से बस्तर में छाया उत्साह, मलखम्भ खिलाड़ियों ने मोहा मन

जगदलपुर, 13 दिसंबर 2025/ संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक 2025 का भव्य समापन समारोह इस बार एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी क्षण का साक्षी बना। भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में शुमार बाईचुंग भूटिया की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। उनके आगमन से बस्तर के नौजवान खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह और नया आत्मविश्वास देखने को मिला।

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
c3bafc7d-8a11-4a77-be3b-4c82fa127c77 (1)

बाईचुंग भूटिया से मिली बस्तरिया युवाओं को प्रेरणा

भारतीय फुटबॉल में ‘सिक्किमी स्निपर’ के नाम से प्रसिद्ध बाईचुंग भूटिया विशेष रूप से बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर पर जगदलपुर पहुंचे थे। उन्होंने खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद कर उनके खेल कौशल, अनुशासन और समर्पण की सराहना की। अपने आदर्श खिलाड़ी को नजदीक से पाकर युवा खिलाड़ी रोमांचित नजर आए।

बाईचुंग भूटिया भारतीय फुटबॉल इतिहास का वह नाम हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पहचान को नई ऊंचाइयां दीं। वे इंग्लैंड के बरी फुटबॉल क्लब के लिए खेलने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व किया। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित किया है।

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

उनके प्रेरक शब्दों और सहज व्यवहार ने बस्तर के खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। यह क्षण बस्तर ओलम्पिक के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

नारायणपुर के मलखम्भ खिलाड़ियों का हैरतअंगेज प्रदर्शन

समापन समारोह के दौरान स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में नारायणपुर जिले के मलखम्भ खिलाड़ियों ने ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया कि पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। प्राचीन भारतीय खेल मलखम्भ के इन दक्ष खिलाड़ियों ने ऊंचे लकड़ी और लोहे के खंभों पर संतुलन, साहस और लचीलेपन का अद्वितीय प्रदर्शन किया।

जोखिम भरे आसनों, गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती कलाबाजियों और पूर्ण नियंत्रण के साथ किए गए करतबों ने दर्शकों को स्तब्ध कर दिया। यह प्रदर्शन केवल खेल नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक खेलों की समृद्ध विरासत का जीवंत उदाहरण था। नारायणपुर के इन युवा खिलाड़ियों ने बस्तर ओलम्पिक के समापन को अविस्मरणीय बनाते हुए क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से स्थापित किया।