बिजली बिल सरकार प्रायोजित लूट का उदाहरण: स्मार्ट मीटर और बढ़ी दरों पर कांग्रेस का हमला

बिजली बिल सरकार प्रायोजित लूट का उदाहरण: कांग्रेस

रायपुर, 13 दिसंबर 2025। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि प्रदेश में बिजली बिल सरकार प्रायोजित लूट का उदाहरण बन गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद से बिजली उपभोक्ताओं की खपत वास्तविक से अधिक दिखाई जा रही है और मीटर सामान्य मीटर की तुलना में कहीं अधिक तेजी से चल रहे हैं।

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सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं का यह अधिकार है कि वे अपनी वास्तविक खपत को जान सकें। पहले से ही चेक मीटर का प्रावधान मौजूद था, लेकिन वर्तमान सरकार ने अपनी कथित लूट को छिपाने के लिए मीटर जांच के नाम पर उपभोक्ताओं से 1000 से 1500 रुपये तक शुल्क लेने का प्रावधान कर दिया है। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर में गड़बड़ी की आशंका है तो उसकी जांच मुफ्त में होनी चाहिए। किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने मांग की कि मीटर चेक शुल्क का यह प्रावधान तत्काल वापस लिया जाए।

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प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिजली बिल के नाम पर जनता को लूट रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक चार बार बिजली दरों में वृद्धि की है और 400 यूनिट हाफ योजना को बंद कर दिया गया है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली के बिल बेतहाशा बढ़ गए हैं, जिससे आम जनता परेशान है।

उन्होंने कहा कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार अब बिजली दरों में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एफपीपीएस) के रूप में अतिरिक्त चार्ज लगाने जा रही है, जिससे बिजली और महंगी हो जाएगी। कांग्रेस इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोयले पर सेस कम हुआ है तो बिजली के दाम कम क्यों नहीं किए जा रहे, बल्कि नया टैक्स क्यों लगाया जा रहा है।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने 400 यूनिट तक की छूट को घटाकर 200 यूनिट कर दिया और उसमें भी यह शर्त जोड़ दी गई कि यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हुई तो पूरी छूट और राहत समाप्त हो जाएगी। ऊपर से सभी घरों में स्मार्ट मीटर लगाकर अधिक वसूली की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिक मुनाफाखोरी के लालच में सरकार नए-नए तरीके अपनाकर जनता से अनाप-शनाप बिजली बिल वसूल रही है।