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ब्रिटेन से लाखों मुसलमानों की नागरिकता पर खतरा, रिपोर्ट ने बताया कानूनों को ‘अत्यधिक और गुप्त’

ब्रिटेन से लाखों मुसलमानों की नागरिकता पर खतरा! रिपोर्ट में चेतावनी, कानून बताया ‘अत्यधिक और गुप्त’

लंदन। ब्रिटेन में नागरिकता कानूनों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। रनीमेड ट्रस्ट और रीप्रिव नाम की दो संस्थाओं की संयुक्त रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा कानूनों के तहत करीब 90 लाख लोग, यानी ब्रिटेन की आबादी का लगभग 13 प्रतिशत, अपनी ब्रिटिश नागरिकता खोने के खतरे में हैं। इनमें बड़ी संख्या मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदायों की बताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह अधिकार ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद के पास है, जिसके तहत वह राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक हित के नाम पर किसी व्यक्ति की नागरिकता छीन सकती हैं, यदि उन्हें लगता है कि वह व्यक्ति किसी दूसरे देश की नागरिकता ले सकता है — भले ही उस देश से उसका कोई व्यक्तिगत संबंध न हो।


2010 से अब तक 200 से ज्यादा लोगों की नागरिकता छीनी गई

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2010 के बाद से अब तक 200 से अधिक लोगों की नागरिकता ‘सार्वजनिक हित’ के नाम पर छीनी जा चुकी है, जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय से हैं।
इसका सबसे चर्चित उदाहरण शमीमा बेगम का मामला है, जिनकी ब्रिटिश नागरिकता रद्द कर दी गई थी, जबकि बांग्लादेश ने उन्हें अपनी नागरिकता देने से इनकार कर दिया


विंडरश घोटाले की दिलाई याद

रिपोर्ट में विंडरश घोटाले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कैरेबियाई मूल के ब्रिटिश नागरिकों की नागरिकता छीन ली गई थी और उन्हें निर्वासित कर दिया गया था।
संस्थाओं का कहना है कि मौजूदा कानून नागरिकता को दो स्तरों में बांट देते हैं

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  • एक, सफेद ब्रिटिश नागरिकों के लिए स्थायी
  • दूसरा, मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सशर्त

कानून में हुए बड़े बदलाव

रिपोर्ट में नागरिकता कानूनों में हुए हालिया बदलावों को बेहद खतरनाक बताया गया है—

  • 2022: बिना किसी नोटिस के नागरिकता छीने जाने का कानून
  • 2025: नया प्रावधान, जिसके तहत अगर अदालत नागरिकता छीनने को गलत भी ठहरा दे, तब भी अपील पूरी होने तक नागरिकता वापस नहीं मिलेगी — इसमें सालों लग सकते हैं

रिपोर्ट इन अधिकारों को “अत्यधिक और गुप्त” बताते हुए कहती है कि इनका दुरुपयोग राष्ट्रवादी राजनीति के बढ़ने के साथ और तेज हो सकता है।


सबसे ज्यादा खतरे में कौन से देश?

रिपोर्ट के अनुसार, जिन देशों से जुड़े ब्रिटिश नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, उनमें शामिल हैं—

  • भारत – 9.84 लाख लोग
  • पाकिस्तान – 6.79 लाख लोग
  • बांग्लादेश
  • सोमालिया, नाइजीरिया
  • उत्तर अफ्रीका और मध्य पूर्व के देश

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीपल ऑफ कलर समुदाय के 3 में से 5 लोग इस कानून से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि सफेद ब्रिटिश लोगों में यह अनुपात 20 में से सिर्फ 1 है। यानी रंगभेदी लोग 12 गुना ज्यादा जोखिम में हैं।


संस्थाओं की मांग

रिपोर्ट जारी करने वाली संस्थाओं ने मांग की है कि—

  • ब्रिटिश नेशनैलिटी एक्ट की धारा 40(2) को पूरी तरह हटाया जाए
  • नागरिकता छीनने के अधिकारों पर तुरंत रोक लगाई जाए

विशेषज्ञों का कहना है कि ये कानून मुस्लिम समुदाय में गहरी असुरक्षा की भावना पैदा कर रहे हैं।

फिलहाल, ब्रिटेन के गृह विभाग ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

 

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