अयोध्या: पौष कृष्ण एकादशी पर रामलला का दिव्य अलौकिक श्रृंगार, चार समय लगता है भोग
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम में विराजमान संपूर्ण ब्रह्मांड के नायक प्रभु श्री रामलला सरकार का प्रतिदिन भव्य और दिव्य श्रृंगार किया जाता है। पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि, विक्रम संवत 2082 (सोमवार, 15 दिसंबर) को रामलला का शुभ और अलौकिक श्रृंगार संपन्न हुआ।
हर दिन की तरह इस दिन भी प्रभु श्रीराम भक्तों को अलग दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए। रामलला को मौसम और समय के अनुसार वस्त्र एवं आभूषण धारण कराए जाते हैं।
चार समय लगता है रामलला को भोग
रामलला को प्रतिदिन चार समय भोग अर्पित किया जाता है। सभी व्यंजन राम मंदिर की रसोई में विधिवत तैयार किए जाते हैं।
- सुबह की शुरुआत होती है बाल भोग से
- दोपहर 12 बजे भोग आरती
- शाम 7:30 बजे संध्या आरती
- रात्रि 8:30 बजे रामलला को शयन कराया जाता है
मौसम के अनुसार वस्त्र धारण
रामलला को हर दिन और हर ऋतु के अनुसार वस्त्र पहनाए जाते हैं—
- गर्मी में सूती व हल्के वस्त्र
- शीत ऋतु में ऊनी वस्त्र व स्वेटर
श्रृंगार में प्रयुक्त फूलों की माला दिल्ली से विशेष रूप से मंगाई जाती है, जो प्रभु के स्वरूप को और भी भव्य बनाती है।
सुबह 6:30 बजे पहली आरती
रामलला की दिनचर्या अत्यंत विधिवत और शास्त्रसम्मत होती है—
- सुबह 6:30 बजे पहली आरती (प्रभु को जगाने के साथ)
- इसके बाद लेप, स्नान और वस्त्र धारण
- पूरे दिन अलग-अलग समय पर भोग और आरती
7:30 बजे तक होते हैं दर्शन
श्रद्धालु सुबह से रात 7:30 बजे तक रामलला के दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद संध्या आरती और शयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है।









