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आंतरिक स्थिरता और आध्यात्मिकता ही शांति का मार्ग: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

भारत की आध्यात्मिक विरासत विश्व की बड़ी चुनौतियों का समाधान देती है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

हैदराबाद।राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि भारत की आध्यात्मिक विरासत आज दुनिया की मानसिक, नैतिक और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भौतिक विकास से जीवन में सुख और शांति संभव नहीं है, इसके लिए आंतरिक स्थिरता, भावनात्मक समझ और मूल्यों पर आधारित सोच अनिवार्य है।

राष्ट्रपति मुर्मु हैदराबाद में ब्रह्माकुमारी शांति सरोवर द्वारा आयोजित ‘Timeless Wisdom of Bharat: Pathways of Peace and Progress’ विषयक सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। यह सम्मेलन संस्था की 21वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया।

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आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम भारत की सबसे बड़ी शक्ति

राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संतुलन भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत है। यही संतुलन भारत को न केवल अपनी आंतरिक समस्याओं से निपटने में सक्षम बनाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और प्रगति का मार्ग दिखाता है।

व्यक्ति के आचरण से समाज में सकारात्मक बदलाव

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने भीतर मानसिक स्थिरता, नैतिक मूल्यों और आत्म-नियंत्रण का विकास करता है, तो उसका प्रभाव समाज में भी दिखाई देता है। इससे अनुशासन, सहिष्णुता और सहयोग जैसी सामाजिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता है।

विश्व शांति के लिए भारत का संदेश

उन्होंने कहा कि भारत की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक चिंतन आज के तनावपूर्ण वैश्विक वातावरण में विश्व शांति, सद्भाव और सतत विकास के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।


 

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