बेंगलुरु।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने कर्नाटक कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनरेगा और नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े अहम मुद्दों को उठाया। इस अवसर पर उनके साथ कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार भी मौजूद रहे।
सचिन पायलट ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक सुधारों को लेकर भाजपा की राजनीतिक इच्छाशक्ति अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन UPA सरकार ने मनरेगा को एक ऐतिहासिक कानून के रूप में लागू किया था, जिसने ग्रामीण भारत को “रोजगार के अधिकार” के साथ सम्मानजनक जीवन की गारंटी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से मनरेगा के प्रति लगातार उदासीन रवैया अपनाया गया है। कभी योजना के बजट में कटौती की गई तो कभी राज्यों को मजदूरी भुगतान में जानबूझकर देरी की गई।
राज्यों पर बढ़ाया गया वित्तीय बोझ
सचिन पायलट ने बताया कि मनरेगा की शुरुआत के समय यह प्रावधान था कि कुल व्यय का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी और शेष राशि राज्यों द्वारा दी जाएगी। लेकिन VB-G RAM-G के नए प्रावधान के तहत राज्यों का हिस्सा बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह बदलाव पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे राज्यों पर भारी दबाव डालता है और उन्हें मजदूरों को समय पर भुगतान करने के लिए अतिरिक्त बोझ उठाने को मजबूर करता है। इससे यह मांग-आधारित योजना अपनी मूल भावना से भटक रही है।
कांग्रेस ने की कड़ी निंदा
कांग्रेस नेता ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही यह योजना अब सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने ये एकतरफा फैसले बिना किसी चर्चा, विपक्षी दलों और प्रमुख हितधारकों से परामर्श के बिना लिए हैं, जिसकी कांग्रेस पार्टी कड़ी निंदा करती है।















