
गरियाबंद में 200 ग्रामीणों का NH-130C पर चक्काजाम, 8 सूत्रीय मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन
गरियाबंद जिले के साहेबिनकछार गांव में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 200 से ज्यादा ग्रामीणों ने NH-130C पर चक्का जाम किया। सड़क, शिक्षक, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग।
गरियाबंद में 200 से ज्यादा ग्रामीणों का NH-130C पर चक्काजाम, 8 सूत्रीय मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई
गरियाबंद। जिले के उदंती-सीता नदी अभ्यारण्य के कोर जोन में स्थित साहेबिनकछार गांव के 200 से अधिक ग्रामीण मंगलवार सुबह सड़क पर उतर आए। शिक्षक, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांगें पूरी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-130C पर पहुंचकर चक्का जाम कर दिया।
हाईवे जाम होने से दोनों ओर यात्री बसों समेत अन्य वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। चक्काजाम का नेतृत्व ग्राम प्रमुख अर्जुन नायक और रूपसिंह मरकाम कर रहे हैं। सूचना मिलने पर इंदागांव पुलिस मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रही है, लेकिन ग्रामीण मांगें पूरी होने से पहले आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं।
तीन साल से भटक रहे ग्रामीण
ग्राम प्रमुख अर्जुन नायक ने बताया कि 28 अक्टूबर को ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी 8 सूत्रीय मांगों से अवगत कराया था। पिछले तीन वर्षों में हर उस मंच पर अपनी बात रखी गई, जहां से समाधान की उम्मीद थी, लेकिन हर जगह केवल आश्वासन मिले।
उन्होंने कहा कि “बार-बार के वादों से ग्रामीण थक चुके हैं, इसलिए इस बार आर-पार की लड़ाई का फैसला लिया गया है।”
ग्रामीणों की 8 सूत्रीय प्रमुख मांगें
- मुख्यमार्ग बम्हनीझोला से ओडिशा सीमा तक 25 किमी पक्की सड़क का निर्माण।
- इंदागांव में स्थानांतरित आदिवासी कन्या छात्रावास एवं कन्या शाला साहेबिनकछार को मूल स्थान पर संचालित कर भवन निर्माण।
- सभी विद्युतविहीन गांवों में शीघ्र विद्युतीकरण।
- ग्राम पंचायत साहेबिनकछार के आश्रित ग्राम करलाझर, साहेबिनकछार, नागेश, कोदोमाली में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत अधूरे शाला भवनों को पूर्ण करना।
- माध्यमिक शाला साहेबिनकछार में नियुक्त लेकिन अनुपस्थित शिक्षक को तत्काल पदभार ग्रहण कराना।
- ग्राम साहेबिनकछार में लगे जियो टॉवर को तत्काल चालू करना।
- उप-स्वास्थ्य केंद्र करलाझर में बिजली और नल-जल सुविधा चालू कराना।
- अधूरी नल-जल योजना को पुनः शुरू करना।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से अब तक कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलने से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।









