
अग्रसेन की बावड़ी: दिल्ली के दिल में बसी प्राचीन जल धरोहर, संरक्षण की मिसाल
कनॉट प्लेस स्थित अग्रसेन की बावड़ी भारत की प्राचीन जल संरक्षण परंपरा का प्रतीक है। जानिए इसकी ऐतिहासिक, स्थापत्य और पर्यावरणीय महत्ता।
अग्रसेन की बावड़ी: दिल्ली के दिल में स्थित प्राचीन जल धरोहर, आज भी संरक्षण की मिसाल
नई दिल्ली | दिल्ली के कनॉट प्लेस क्षेत्र में स्थित अग्रसेन की बावड़ी भारत की प्राचीन जल संरक्षण परंपरा की एक अनमोल धरोहर है। महाराज अग्रसेन द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक बावड़ी राजधानी की सबसे पुरानी और संरक्षित जल संरचनाओं में गिनी जाती है।
जल शक्ति मंत्रालय (DoWR, RD & GR) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह बावड़ी तीन स्तरों में विभाजित है और इसकी लंबाई लगभग 60 मीटर तथा चौड़ाई करीब 15 मीटर है। स्थापत्य कला और जल प्रबंधन की दृष्टि से यह संरचना अपने समय से कहीं आगे की सोच को दर्शाती है।
जल संरक्षण का जीवंत उदाहरण
अग्रसेन की बावड़ी केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि पारंपरिक जल प्रणाली (Traditional Water System) का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाती है कि किस प्रकार प्राचीन भारत में वर्षा जल संचयन और जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाती थी।
आज के समय में, जब जल संकट एक गंभीर वैश्विक चुनौती बनता जा रहा है, अग्रसेन की बावड़ी जैसी संरचनाएं जल संरक्षण और सतत विकास का संदेश देती हैं।
पर्यटन और विरासत संरक्षण का केंद्र
कनॉट प्लेस के मध्य स्थित होने के कारण यह बावड़ी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। इसे दिल्ली की सबसे अच्छी तरह संरक्षित बावड़ियों में शामिल किया गया है और यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक व जल विरासत को दर्शाती है।
जल शक्ति मंत्रालय ने इस अवसर पर नागरिकों से जल संरक्षण और ऐतिहासिक जल धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की है।











