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स्व-सहायता समूह से जुड़कर मीना रवि बनीं लखपति दीदी, बदली परिवार की तक़दीर

बलरामपुर जिले के ग्राम मरमा की मीना रवि ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर संघर्ष से सफलता की कहानी लिखी, आज बनीं आत्मनिर्भर ‘लखपति दीदी’।

संघर्ष से सफलता तक: स्व-सहायता समूह से जुड़कर मीना रवि बनीं ‘लखपति दीदी’, बदली परिवार की तक़दीर

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बलरामपुर, 12 फरवरी 2026।जिले के रामचन्द्रपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम मरमा निवासी मीना रवि ने महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने और अपने परिवार के जीवन को नई दिशा दी है। कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने वाली मीना आज आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की सशक्त मिसाल बन चुकी हैं।

अभावों से भरा था जीवन

कुछ वर्ष पूर्व तक मीना रवि का जीवन कठिनाइयों और अभावों से घिरा हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। घर का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करनी पड़ती थी, तब जाकर परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। सीमित आय के कारण बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और बेहतर भविष्य की कल्पना भी मुश्किल लगती थी।

स्व-सहायता समूह बना जीवन बदलने का माध्यम

महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय मीना के जीवन में निर्णायक मोड़ साबित हुआ। समूह से उन्हें नियमित आय का साधन मिला, साथ ही उन्होंने गांव में कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) का कार्य भी संभाला। इससे उनकी मासिक आय 1,500 रुपए से बढ़कर 2,000 रुपए तक पहुंच गई।

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60 हजार ऋण से शुरू की राशन दुकान, लाखों की कमाई

समूह से मिले सहयोग के साथ मीना ने चार किश्तों में कुल 60,000 रुपए का ऋण लिया और अपने पति के साथ मिलकर एक राशन दुकान की शुरुआत की। आज इस दुकान से उन्हें सालाना लगभग 1.5 लाख रुपए की आय हो रही है।

अपनी मेहनत और समूह से मिले ऋण की सहायता से उन्होंने 5 डिसमिल जमीन खरीदी और उसी पर दुकान स्थापित की, जो उनके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।

‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं प्रेरणा

आज मीना रवि आत्मनिर्भर बनकर लाखों की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जा रही हैं। वे बच्चों की शिक्षा सहित परिवार की सभी आवश्यकताओं को आत्मसम्मान के साथ पूरा कर पा रही हैं।

मीना कहती हैं कि यदि महिलाओं को सही अवसर, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे स्वयं सशक्त बनकर पूरे परिवार और समाज की दिशा बदल सकती हैं।

 

Ashish Sinha

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