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‘धुरॉक्सिक’ बनाम ‘टी-स्टाइल सिनेमा’: राम गोपाल वर्मा ने 19 मार्च को बताया ‘सच बनाम स्टाइलिंग’ की टक्कर

मुंबई, 13 जनवरी 2026 — मशहूर फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा (RGV) ने अपनी फिल्म #Dhuroxic को लेकर भारतीय सिनेमा की मौजूदा प्रवृत्तियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 19 मार्च को रिलीज़ होने वाली इस फिल्म को “अल्ट्रा रियलिस्टिक सिनेमा और अल्ट्रा अनरियलिस्टिक सिनेमा” के बीच निर्णायक टकराव बताया है।

राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया पर एक लंबे पोस्ट में ‘D स्टाइल’ और ‘T स्टाइल’ सिनेमा की तुलना करते हुए कहा कि धुरॉक्सिक कारण-परिणाम और परिणामों पर आधारित है, जहां हिंसा के नैतिक, मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक आधार होते हैं।

RGV का तर्क: हिंसा ज़रूरत है, स्टाइल नहीं

RGV के अनुसार,

  • D स्टाइल में किरदार इसलिए हिंसक होते हैं क्योंकि परिस्थितियां उन्हें मजबूर करती हैं
  • जबकि T स्टाइल में हिंसा सिर्फ एटीट्यूड और कूल दिखने के लिए होती है

उन्होंने कहा कि D दर्शकों को बुद्धिमान मानता है, जबकि T दर्शकों को केवल उत्तेजना (stimulation) चाहने वाला समझता है।

हीरो: इंसान या ‘बुलेटप्रूफ भगवान’?

राम गोपाल वर्मा ने मौजूदा पैन-इंडिया फिल्मों में दिखाए जा रहे नायकों पर भी सवाल उठाए।
उनके मुताबिक:

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  • D का नायक इंसान है — जो गलती कर सकता है, खून बहा सकता है, बूढ़ा हो सकता है
  • T का नायक बुलेटप्रूफ पैदा होता है, पूरी कहानी उसकी “अल्ट्रा कूल इमेज” बचाने के लिए झुक जाती है

RGV ने कहा कि T-स्टाइल सिनेमा में पूरी दुनिया सिर्फ नायक की पूजा करने के लिए मौजूद होती है।

कैमरा भी झूठ और सच बताता है

RGV ने फिल्ममेकिंग की तकनीक पर भी तीखी टिप्पणी की:

  • D का कैमरा गवाह की तरह व्यवहार करता है — साइलेंट, ऑब्ज़र्वेशनल
  • T का कैमरा मालिक की तरह — स्लो मोशन, नकली इंटेंसिटी और बनावटी रोमांच

उन्होंने कहा, D बेचैन करता है, T सिर्फ प्रभावित करने की कोशिश करता है।

19 मार्च: ‘जजमेंट डे’

राम गोपाल वर्मा ने सवाल उठाया कि क्या दर्शक अब भी स्लो मोशन में चलते “डार्क हीरो” को सपोर्ट करेंगे?
क्या सिगरेट पीते हुए स्लो मोशन चलना अब भी किरदार की गहराई माना जाएगा?
क्या हिंसा सिर्फ तमाशे के लिए स्वीकार्य रहेगी?

RGV के अनुसार, 19 मार्च को ‘धुरॉक्सिक’ देखना ऐसा होगा जैसे एक ओर युद्ध क्षेत्र में खड़े हों और दूसरी ओर फैशन शूट के पास।

हीरो वर्शिप का अंत या पुष्टि?

RGV ने दावा किया कि धुरॉक्सिक

  • या तो पैन-इंडिया सिनेमा में हीरो वर्शिप के अंत की शुरुआत करेगा,
  • या यह साबित करेगा कि दर्शक अब भी “बुलेटप्रूफ मर्दानगी” को ही चाहते हैं।

उन्होंने कहा, अब दर्शक देवता नहीं, अपने जैसे इंसान देखना चाहते हैं — या शायद नहीं… यह फैसला सिर्फ भगवान और दर्शक करेंगे।

 

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